जौनपुर में इन दिनों पुलिस और पत्रकारों के बीच संवादहीनता का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। जिले के कई पत्रकारों ने खुलकर आरोप लगाया है। कि पुलिस प्रशासन समय पर आधिकारिक बयान (बाइट) उपलब्ध नहीं करा रहा, जिससे न केवल खबरों की प्रमाणिकता प्रभावित हो रही है। बल्कि पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
C U G नंबर पर नहीं मिलता जवाब
पत्रकारों का कहना है। कि पुलिस अधिकारियों का सीयूजी नंबर अक्सर रिसीव नहीं होता। किसी भी बड़ी घटना के बाद आधिकारिक प्रतिक्रिया पाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। लेकिन स्पष्ट और समयबद्ध जानकारी नहीं मिलती।
मीडिया सेल का औचित्य क्या है।
जब हर जिले में पुलिस मीडिया सेल सक्रिय है। तो फिर जौनपुर में समय पर सूचना और बाइट क्यों नहीं उपलब्ध हो पा रही है।पत्रकारों का सवाल है। कि यदि मीडिया को अधिकृत जानकारी ही नहीं मिलेगी, तो अफवाहों पर कैसे लगाम लगेगी।
बयान देने से परहेज़ क्यों
कई मामलों में पुलिस की चुप्पी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या यह केवल लापरवाही है। या फिर किसी मामले को दबाने की कोशिश इस पर पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पारदर्शिता बनाम खामोशी
लोकतंत्र में मीडिया और पुलिस दोनों की अहम भूमिका है। जहां पुलिस कानून व्यवस्था संभालती है, वहीं मीडिया जनता तक सही सूचना पहुंचाने का कार्य करती है। ऐसे में संवाद की कमी कई तरह की शंकाओं को जन्म दे सकती है।
पत्रकारों की मांग
पत्रकारों ने मांग की है। कि
समय पर आधिकारिक बाइट उपलब्ध कराई जाए
CUG नंबर सक्रिय और रिस्पॉन्सिव रहे।
मीडिया सेल को प्रभावी और जवाबदेह बनाया जाए।
अब देखना यह है। कि जौनपुर पुलिस इस बढ़ते आक्रोश पर क्या रुख अपनाती है। क्या संवाद की खाई पाटी जाएगी या सवाल यूं ही गूंजते रहेंगे।
मामला गरम है। और जवाब का इंतजार जारी है।
रिपोर्ट – सुरेश कुमार शर्मा











Users Today : 92
Users This Year : 17405
Total Users : 29998
Views Today : 195
Total views : 59475