वाराणसी।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक रुइया ग्राउंड पर 12 फरवरी से प्रारंभ हुआ भव्य खेल महोत्सव आज उत्साह, उमंग और ऊर्जा के साथ सम्पन्न हो गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस दस दिवसीय खेल उत्सव में इनडोर एवं आउटडोर मिलाकर कुल 10 प्रकार की खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें सर सुंदरलाल चिकित्सालय के नर्सिंग ऑफिसर, एस.एन.ओ., डी.एन.एस., ए.एन.एस., पैरामेडिकल स्टाफ सहित लगभग 500 खिलाड़ियों ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया।
पूरा रुइया ग्राउंड खेल भावना, टीम स्पिरिट और प्रतिस्पर्धात्मक ऊर्जा से सराबोर रहा। खिलाड़ियों ने खेल को केवल प्रतियोगिता नहीं बल्कि स्वास्थ्य, अनुशासन और एकता का माध्यम बताया।

मेडिकल सुपरिटेंडेंट का वक्तव्य
मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. के.के. गुप्ता ने समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के खेल आयोजनों से स्टाफ के भीतर नई ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने कहा कि “स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्मियों के लिए शारीरिक रूप से सक्रिय रहना अत्यंत आवश्यक है। खेल हमें चुस्त-दुरुस्त रखते हैं, हमारी कार्यक्षमता बढ़ाते हैं और टीम भावना को मजबूत करते हैं। जब हमारा स्टाफ स्वस्थ और ऊर्जावान रहेगा तभी हम मरीजों को बेहतर सेवा दे पाएंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को और बड़े स्तर पर आयोजित करेगा ताकि सभी कर्मचारियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले।
डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट का प्रेरक संदेश
डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अंकुर ने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक सकारात्मक सोच का अभियान है। उन्होंने जोर देकर कहा, “फिजिकल फिटनेस ही मानसिक सुदृढ़ता की नींव है। जब हम स्वयं स्वस्थ और सक्रिय रहेंगे, तभी मरीजों की सेवा पूर्ण समर्पण और दक्षता से कर सकेंगे। हर व्यक्ति को प्रतिदिन थोड़ा समय निकालकर व्यायाम या खेल अवश्य करना चाहिए।”
उन्होंने बताया कि इस खेल महोत्सव में विजेता टीमों को मेडल एवं शील्ड प्रदान की गई। प्रतियोगिता पूर्णतः आपसी सौहार्द और खेल भावना पर आधारित रही तथा इसमें किसी प्रकार की धनराशि निर्धारित नहीं की गई।
समापन समारोह की झलक
समारोह के दौरान खिलाड़ियों को मेडल एवं शील्ड देकर सम्मानित किया गया। उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया और आयोजन समिति की सराहना की।
इस खेल महोत्सव ने यह संदेश दिया कि चिकित्सा सेवा से जुड़े कर्मियों के लिए स्वास्थ्य केवल कर्तव्य नहीं बल्कि जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। खेल के माध्यम से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक मजबूती भी प्राप्त होती है, जो अंततः मरीजों की बेहतर सेवा में सहायक सिद्ध होती है।










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