चंन्दौली बबुरी षड्यंत्र व संदिग्ध स्थिति को बयां कर रहा है अशोक इंटर कॉलेज बबुरी में चोरी का मामला
विगत पिछले तीन-चा में वर्षो से अशोक इंटर कॉलेज पूरे चंदौली जिले में किसी न किसी घटना को लेकर सुर्खियों में बना रहता है। सन 1975 में वित्तीय मान्यता मिलने के बाद अशासकीय सहायता प्राप्त यह विद्यालय सोसाइटी और समिति के आधार पर चल रही थी।
लेकिन जब से निलंबित व भ्रष्ट प्रबंधक अशोक सिंह ,जरखोर , हुए है। तब से लेकर अब तक यह अपने बेटे और रिश्तेदारों को विद्यालय की जमीन को बेचने का कार्य कर रहे थे , यही नहीं जो विद्यालय सोसाइटी और समिति के द्वारा संचालित की जा रही थी, उसी जमीन को हड़पने की नीयत से यह फर्जी तरीके से अपने रिश्तेदार के नाम से फर्जी ट्रस्ट बनाकर के विद्यालय को हथियाने व कब्जा करना चाहते थे।
यही नहीं, भ्रष्टाचार, अराजकता, लूट- खसोट के बाद अब विद्यालय में सामान की चोरी जोरों पर हो रही है, प्रबंधक अशोक सिंह के द्वारा पहले विद्यालय के पेड़ बेचे गए ,उसके बाद विद्यालय की जमीन बेची गई, अब विद्यालय में आए दिन सामान की चोरी बराबर हो रही है,
दिनांक 9 -02 -2026 को रात में संदिग्ध स्थिति में भौतिक विज्ञान के लैब से इनवर्टर और बैटरी की चोरी की गई है, जब इसकी सूचना चौकी प्रभारी को मिली तो वह मौके पर पहुंचकर सारी स्थिति को जानने के बाद उन्होंने कहा कि यह चोरी नहीं बल्कि षड्यंत्र कारियो द्वारा पहले से ही प्रि प्लानिंग करके सामान को निकाला गया है। यह चोरी नहीं बल्कि एक संदिग्ध स्थिति को बयां कर रहा है।
क्योंकि प्रधानाचार्य राणा सिंह के न रहने पर सहायक प्रधानाचार्य वीरेंद्र सिंह जो वर्तमान में प्रधानाचार्य के चार्ज का निर्वहन करते हुए दिनांक 9 -02 -2026 को दिन में ही वीरेंद्र सिंह के द्वारा भौतिक विज्ञान कक्ष से कैमरा निकलवाना तथा 11 दिन के बाद बाहर से उसी दिन शाम करीब 6:00 बजे के लगभग प्रधानाचार्य राणा सिंह का विद्यालय में उपस्थित होना, तथा समान का गायब होना,
यह एक षड्यंत्र व संदिग्ध स्थिति को बयां कर रहा है। जबकि विद्यालय में रात में एक सुरक्षा कर्मी की बराबर तैनाती होने के बाद भी यह चोरी जैसा घृणित कार्य किया जा रहा है। जबकि बच्चों के इंटर की प्रैक्टिकल परीक्षा होने से पहले ही प्राधिकृत नियंत्रक के रूप में नियुक्त जिला विद्यालय निरीक्षक चंदौली के आदेशानुसार पूरे विद्यालय में कैमरा लगाया जा चुका था।
पूरे विद्यालय में कैमरा लगाने की सूचना स्वयं सहायक प्रधानाचार्य वीरेंद्र कुमार सिंह ने जिला विद्यालय निरीक्षक को दी थी, उसके बाद यह सारा षड्यंत्र रचा गया। जबकि पूरे विद्यालय में सबसे महंगा और कीमती लैब भौतिक विज्ञान का ही है जिसमें लगभग 20 लाख से ऊपर के प्रैक्टिकल संबंधित समान पड़े हुए हैं इसके बावजूद आज यह कक्ष असहाय असुरक्षित जर्जर व हीन दीन दशा में पड़ा हुआ है।
विद्यालय में चाहे लकड़ी बेचना हो चाहे मिड डे मील का सामान बाहर भेजना हो चाहे विद्यालय से रजिस्टर ,चेक बुक ,पासबुक ,रसीद व अन्य अध्यापकों से संबंधित पुराने डॉक्यूमेंट तथा समान की चोरी होती है तो कैमरे को तुरंत हटा दिया जाता है या उसे बिगाड़ दिया जाता है। यह सिलसिला विगत कई वर्षों से चल रहा है।
जबकि इन सारे षडयंत्रों की सूचना प्राधिकृत नियंत्रक व जिला विद्यालय निरीक्षक चंदौली को होने के बाद भी जिला प्रशासन मौन व चुप्पी साधे बैठा हुआ है। विशेष सूत्रों से पता चला है कि भ्रष्टाचार अराजकता लूट खसोट एवं विद्यालय की जमीन को बेचने में लिप्त होने के कारण शासन ने यहां के प्रबंधक व प्रबंध समिति को दो-दो बार 16 D व 16D4 की कार्यवाही के तहत निलंबित कर चुका है।
और प्रधानाचार्य के ऊपर वित्तीय गमन फर्जी नियुक्ति और फर्जी मार्कशीट पर नौकरी करने की जांच जोरो से चल रही है। क्षेत्रीय जनता का कहना है की इसी कर्म से बौखलाए षड्यंत्र कारियो ने अब विद्यालय से सामान को भी हटा कर घर ले जाना शुरू कर दिए हैं।
प्राधिकृत नियंत्रक के रूप में नियुक्त जब जिला विद्यालय निरीक्षक से इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ स्पष्ट कह दिया कि मैं पुलिस को इसकी सूचना दे चुका हूं अब इसके ऊपर पुलिस प्रशासन जो उचित होगा वह कार्यवाही करेगी।
रिपोर्ट – अलीम हाशमी











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