काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) हैदराबाद गेट के समीप सुसुवाही क्षेत्र में बीती रात एक हृदयविदारक अग्निकांड की घटना सामने आई, जिसमें एक गरीब धोबी की वर्षों पुरानी दुकान जलकर पूरी तरह राख हो गई। घटना रात लगभग 2:00 बजे के आसपास की बताई जा रही है।

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वाराणसी।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) हैदराबाद गेट के समीप सुसुवाही क्षेत्र में बीती रात एक हृदयविदारक अग्निकांड की घटना सामने आई, जिसमें एक गरीब धोबी की वर्षों पुरानी दुकान जलकर पूरी तरह राख हो गई। घटना रात लगभग 2:00 बजे के आसपास की बताई जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित दुकानदार सोमारू कनौजिया ने बताया कि वे इन दिनों अपना मकान निर्माण करा रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने एक दिन पूर्व ही बैंक से लगभग ₹1,50,000 (डेढ़ लाख रुपये) नगद निकालकर सुरक्षित रखने हेतु दुकान में टांग दिया था, जो आग की भेंट चढ़ गया। इसके अतिरिक्त दुकान में ग्राहकों के धुलाई एवं पॉलिश हेतु आए हुए लगभग ₹35 से ₹40 लाख मूल्य के गर्म कपड़े, महंगी साड़ियां एवं अन्य परिधान भी जलकर नष्ट हो गए।

स्थानीय लोगों के अनुसार आग लगने की सूचना मिलते ही आसपास के निवासियों ने तत्काल राहत प्रयास प्रारंभ किए तथा फायर ब्रिगेड को सूचित किया। क्षेत्र में दुकानें सटी होने के कारण स्थिति अत्यंत भयावह हो सकती थी, किंतु दमकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया, जिससे अन्य दुकानों को नुकसान होने से बचा लिया गया। हालांकि पूरी तरह से केवल सोमारू कनौजिया की ही दुकान जलकर खाक हो गई।

इस संबंध में वार्ड संख्या 39, सुसुवाही के पार्षद सुरेश पटेल उर्फ गुड्डू ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि —
“सोमारू कनौजिया जी बहुत पुराने एवं मेहनतकश व्यक्ति हैं। उनकी दुकान भी वर्षों से चलती आ रही है। इस दुखद घटना से हम सभी अत्यंत आहत हैं। हमने इस मामले में क्षेत्रीय विधायक जी से भी वार्ता की है, ताकि पीड़ित परिवार को समुचित आर्थिक सहायता मिल सके।”

उन्होंने मानवीय संवेदना प्रकट करते हुए मौके पर ही पीड़ित को ₹5,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की तथा आगे हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

यह घटना न केवल एक परिवार की आजीविका पर गंभीर आघात है, बल्कि क्षेत्र के छोटे व्यवसायियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित को तत्काल राहत राशि, मुआवजा एवं पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराई जाए, जिससे वह पुनः अपने व्यवसाय को खड़ा कर सके।

 

रिपोर्ट धनेश्वर साहनी

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