कांग्रेसी सांसदों ने लोकसभा में आज भी भरपूर नंगनाच किया और लोकसभा सोमवार तक के लिए स्थगित करवा दी।
जनरल मनोज नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक में लिखी गयी कुछ लाइनों को कांग्रेसी अपने नंगनाच का आधार बना रहे हैं। कांग्रेसी उन्हीं पंक्तियों के आधार पर प्रधानमंत्री मोदी को अनिर्णय तथा कायरता के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं। इस पूरे सप्ताह लोकसभा उन्होंने चलने नहीं दी है। जबकि इस पूरी समस्या का कुछ ही क्षणों में तत्काल हल मौजूद है।
क्योंकि जनरल मनोज नरवणे अभी जीवित और स्वस्थ हैं, लेकिन उनकी लिखी पंक्तियों की अपनी सुविधानुसार व्याख्या कर रही है कांग्रेसी फौज़। अतः देश की सेना का नेतृत्व कर चुके व्यक्ति का क्या यह दायित्व नहीं है कि, देश के समक्ष वह स्थिति स्पष्ट करें कि, उन्होंने जो लिखा है उसका सीधा सपाट अर्थ क्या है। ताकि देश के समक्ष स्थिति स्पष्ट हो सके। लेकिन जनरल मनोज नरवणे एक सप्ताह से मौन साधे हुए इस पूरे नंगनाच को देख रहे हैं।
क्या मोदी सरकार द्वारा CDS नहीं बनाए जाने की कुंठा/पीड़ा की ही इसमें बड़ी भूमिका है.?
साज़िश तो साफ नज़र इसलिए भी आती है कि, जिस पुस्तक को छापने की अनुमति भारतीय सेना द्वारा नहीं दी गयी थी, वही पुस्तक बाकायदा छपे रूप में अपने हाथ में लेकर दो दिनों से कांग्रेसी अधेड़ कैसे नाच रहा था। इसका मतलब प्रकाशक इस साज़िश में शामिल है। निश्चित रूप से उसने ही यह पुस्तक कांग्रेसी अधेड़ को भी बेंची है। क्योंकि बाज़ार में यह पुस्तक आ ही नहीं सकती।
अतः इतनी बड़ी साज़िश के लिए प्रकाशक को तत्काल उठा कर उसके नितंब और पीठ पर कानून के निशान NIA को ठीक से दर्ज करने चाहिए। बाकी जनरल मनोज नरवणे को देश के सामने आकर यह बताना चाहिए कि, अभी वो जिंदा हैं, मरे नहीं। सरकार के पक्ष या विपक्ष में जो भी तथ्य हो, उस सच को देश के सामने बताना चाहिए… एक सैनिक से देश यही उम्मीद करता है।








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