यौमे जम्हूरिया की क़िब्ल शाम, दानिश सिद्दीकी फ़ैंस क्लब की जानिब से “एक शाम क़ौमी एकता के नाम” मुशायरा — महज़ एक अदबी प्रोग्राम नहीं रहा, बल्कि ये शाम मोहब्बत, भाईचारे, अदब और इंसानियत की वो रौशन मिसाल बन गई, जिसने दिलों को जोड़ा, सोचों को वुसअत दी और रूहों को सुकून बख़्शा। ये कामयाबी किसी एक की नहीं, बल्कि आप तमाम अज़ीज़ों की दुआओं, मेहनत, मोहब्बत और ख़ुलूस भरे तआवुन का नतीजा है, जिसने इस महफ़िल को यादगार बना दिया।
आप सब ने अपनी मसरूफ़ ज़िंदगी से क़ीमती लम्हात निकाल कर इस महफ़िल को जो वक़ार, शरफ़ और रौनक़ बख़्शी, वो मेरे लिए ही नहीं, बल्कि मेरी पूरी टीम के लिए हौसले की वो रौशनी बनी, जिसने थकान को उम्मीद में और कोशिश को यक़ीन में बदल दिया। शायरों के अशआर हों या कवियों की पंक्तियाँ, हर लफ़्ज़ में आपके जज़्बात की गर्मी, आपके एहसास की सच्चाई और आपकी मोहब्बत की खुशबू महसूस होती रही और यही इस शाम की असल जीत थी।
हम जानते हैं कि इंसानी कोशिश मुकम्मल नहीं होती। हमे एहसास है कि वख्त कम और काम ज्यादा होने की वजह हम अपने बहुत अज़ीज़ दोस्तो को कहना भूल गए जिसका मुझे बहुत अफसोस है जिसको बया करना मुश्किल है इस कमी, ख़ामी या मेरी कोताही को अपना छोटा भाई,दोस्त समझ कर दिल से माफी का तलबगार हूँ, आइंदा से कोशिश करूंगा कि ऐसी गलती दुबारा न हो। और वादा है कि इन मशवरों को अपनी ताक़त बनाकर, आइंदा साल और ज़्यादा सोच, संजीदगी और मेहनत के साथ आप लोगो से मशवरा लेते हुए इससे भी बेहतर, इससे भी यादगार प्रोग्राम पेश करेंगे ताकि अदब की ये शमा और तेज़ जले, क़ौमी एकता का ये पैग़ाम और दूर तक पहुँचे, और मोहब्बत का ये सफ़र और मज़बूत हो।
आज दिल शुकर से भरा हुआ है ,आपकी मौजूदगी के लिए,
आपकी दुआओं के लिए,आपकी मोहब्बत और ऐतमाद के लिए,और उस अपनाइयत के लिए, जिसने इस महफ़िल को सिर्फ़ एक इवेंट नहीं, बल्कि दिलों की मुलाक़ात बना दिया।
आप सब का एक बार फिर तह-ए-दिल से शुक्रिया —
आपका भाई, आपका ख़ादिम
दानिश सिद्दीकी (रूमी)पूर्व सभासद, दानिश सिद्दीकी फैन्स क्लब अध्यक्ष भदोही
मो0 8840256620
रिपोर्ट – फारुख जाफरी










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