जौनपुर,
जलालपुर क्षेत्र में इन दिनों बना मानक बिना पंजीकरण और बिना डिग्री वाले अस्पताल कुकुरमुत्तों की तरह पनपते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है। कि इन अस्पतालों का संचालन खुलेआम हो रहा है। लेकिन ज़िम्मेदार विभाग और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। सूत्रों और क्षेत्रीय नागरिकों के अनुसार इन अवैध अस्पतालों को प्रभारी निरीक्षक आलोक सिंह की कथित मिलीभगत प्राप्त हैं। जिसके चलते न तो कोई जांच होती है। और न ही कार्रवाई वहीं दूसरी ओर जौनपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी सीएमओ की चुप्पी पर भी कई सवाल खड़े हो रहे है।
फर्जी डॉक्टर झोलाछापों से कराएं जा रहे सीजर,सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन अस्पतालों में बाहरी झोलाछाप डॉक्टरों को बुलाकर महिलाओं के सीजर आपरेशन कराएं जा रहे हैं।
जिनके पास न तो वैध एमबीबीएस डिग्री है। और न ही आपरेशन की अनुमति इसका खामियाजा गरीब और भोली भाली जनता को भुगतना पड़ रहा है। कई मामलों में महिलाओं की हालत बिगड़ने और नवजातों की जान ख़तरे में पड़ने की बात सामने आ रही है। जनता के जीवन से खिलवाड़ स्थानीय लोगों का कहना है। कि यह पूरा नेटवर्क सिर्फ धन उगाही के लिए चलाया जा रहा है। मोटी रकम लेकर जानलेवा इलाज किया जा रहा है l और किसी अनहोनी की स्थिति में पीड़ित परिवार को चुप करा दिया जाता है।
प्रसाशन पर उठे सवाल
आखिर बिना मानक के अस्पताल कैसे चल रहे हैं। फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रहा है, न तो फायर की व्यवस्था ना ही रजिस्ट्रेशन, और बेसमेंट में धड़ल्ले से चल रहा है अस्पताल क्या सीएमओ कार्यालय को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है। या जान बूझकर अनदेखी की जा रही है।
जनता की मांग
क्षेत्रीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने उच्चस्तरीय जांच अवैध अस्पतालों को तत्काल सील करने और दोषी अधिकारियों व अस्पताल संचालकों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कि है I अब देखना यह है कि स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक, और जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब तक खामोश रहता है। या सब कुछ ठंडे बस्ते में ही सिमट कर रह जाएगा l










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