श्री देवरहा हंस बाबा ट्रस्ट से संबंधित भूखंड अतिक्रमणकारी गिद्धो का डेरा बन रहा

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मीरजापुर

तत्वदर्शी महापुरुष ब्रह्मवेत्ता देवरहा हंस बाबा ट्रस्ट से संबंधित भूखंड अतिक्रमण कारी गिद्धो का डेरा बनता जा रहा है और तथाकथित भूमाफिया सफेदपोशो के संरक्षण मे धर्मार्थ कार्य की भूमि पर कब्जे का कुत्सित प्रयास कर रहे है। जी हा, हम बात कर रहे है मीरजापुर जिले के उस देवरहा बाबा आश्रम के संबंध मे जहा पिछले वर्षो संघ प्रमुख मोहन भागवत, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव एवं विश्व हिंदू परिषद के महासचिव एवं उपाध्यक्ष चंपक राय, विहिप के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक दिनेश आकर राष्ट्र के कल्याण के लिए अनुष्ठान किये और पहले भी संघ और विहिप के वरिष्ठ जन समय समय पर यहा आकर अनुष्ठान पूजन करते रहे है। कारण कि हंस बाबा मा सरस्वती से साक्षात्कार के बाद अखंड भारत के निर्माण और सनातन को विश्वव्यापी बनाने के संकल्प के साथ लगातार कार्य कर रहे है।

सोमवार को प्रेस वार्ता कर आश्रम ब्रह्मवेत्ता देवरहा हंस बाबा ट्रस्ट के न्यासी अतुल कुमार सक्सेना एवं आश्रम व्यवस्था से जुडे बाबा रामसुंदर दास जी ने आरोप लगाया कि अष्टभूजा मे दो स्थानो पर कुल लगभग 800 एकड भूमि है, जिसमे रजिस्ट्री के माध्यम से दानदाता एवं वर्तमान मे बाबा के वृंदावन आश्रम के केयरटेकर मनुराम माझी द्वारा वर्ष 2010 मे ट्रस्ट को दान मे मिली लगभग 200 एकड भूमि के हिस्से पर बिना बटवारा हुए अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य का प्रयास किया जा रहा है, वह भी तब जबकि उक्त भूमि/भूखंड पर स्टे है। बाबा रामसुंदर दास जी महाराज ने बताया कि जब ट्रस्ट की भूमि आराजी संख्या 810 एवं 811 पर तथाकथित भू माफियाओ के द्वारा अवैध कब्जे की जानकारी हुई, तो गत दिनो जाकर उन्हे रोका गया, लेकिन कार्य रोकने की बजाय ट्रस्ट एवं बाबा जी के प्रति ही गलत कमेंट करते हुए अप्रत्यक्ष रुप से धमकी दी गयी।

न्यासी अतुल कुमार सक्सेना ने बताया कि ट्रस्ट एवं हंसबाबा का एकमात्र उद्देश्य धर्मार्थ कार्य गोसेवा का है और कोई अन्य कार्य नही। उक्त समस्त भूमि कृषि भूमि थी।आरोप लगाया कि पूर्व मे स्थानीय लेखपाल कानून गो सहित राजस्व के अधिकारी मिलकर वर्ष 2023 मे तत्कालीन उपजिलाधिकारी को या तो दिग्भ्रमित कर या फिर उन्हे प्रलोभन देकर ट्रस्ट को बिना सूचना/परामर्श किये कृषि भूमि को आबादी मे दर्ज करा दिया गया, जो अब विवाद और अवैध कब्जे को भेंट चढ रहा है। कथित भूमाफिया ने व्यावसायिक दृष्टिकोण से कार्नर की भूमि पर कवैध कब्जा कर रहा है। इस संबंध मे वर्तमान एसडीएम ने स्टे भी दे रखा है।

पत्रकार वार्ता मे बताया कि वर्ष 2008 मे ललई, फुलई और मुन्नन ने 30 एकड भूमि सेल डिड किया और म्यूटेशन भी हो गया। कतिपय कारणो से कंप्यूटर रिकार्ड मे परिवर्तन नही हो सका। इसकी जानकारी जब तीन साल पहले हुई तो कमिश्नर से मिलकर कहा गया। अभी तक एसडीएम के यहा पेंडिंग पडा हुआ है। वह अभी तक कंप्यूटर पर दर्ज नही हो पाया, जो कार्य मात्र थतीस मिनट का है, वह तीन साल मे भी नही हो पाया।

यही नही, महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्थल माने जाने वाले गेरुआ तालाब, जहा तीनो युगो मे तत्वदर्शी महापुरुष मानव कल्याण के लिए तपस्यारत रहे, वहा गंदगी देख बाबा जी ने सफाई कराया जिसमे से 2000 टाली कूडा गंदगी निकलवाकर ट्यूबवेल से पानी भरवाया था। इसके ठीक सामने विंध्य विकास प्राधिकरण काभूखंड है। उस पर भी अवैध कब्जा किया गया है। कब्जेदारो ने 80 प्रतिशत प्राधिकरण की और 20 प्रतिशत जमिन ट्रस्ट की भी कब्जाई है। 2017 से ही इसकी जानकारी प्राधिकरण को दी गयी है, लेकिन 8 साल बीत जाने के बाद भी यह मुक्त नही हो सका।

बाबा एवं न्यासी ने कहा है कि मीडिया के माध्यम से हम इस प्रकरण मे बडे अधिकारी अथवा नेता को ब्लेम न करते हुए जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं राजस्व अधिकारियो से आग्रह कर रहे कि उक्त उपजिलाधिकारी के इस कृत्य का बिजिलेंस इन्क्वायरी करते हुए उक्त आबादी को निरस्त कर कृषि मे शामिल करते हुए ट्रस्ट की जमीन की नापी कराकर उसे अलग करा दिया जाय, ताकि ट्रस्ट के संविधान मे उल्लिखित उद्देश्यो गोपालन एवं वृक्षारोपण के कार्य मे आ रही बाधा दूर हो सके। यदि समाधान नही हुआ, योगी दरबार, रेवेन्यू सेक्रेटरी और चीफ सेक्रेटरी तक और जरूरत पडी तो लोकायुक्त तक ट्रस्ट की भूखंड के अवैध कब्जे के खालाफ जाएंगे।

 

 

रिपोर्ट – भोलानाथ यादव

 

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