काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में काशी शब्दोत्सव समारोह की का आज अंतिम दिन में हजारों शिक्षक और छात्र-छात्राएं भारत की संस्कृति पर विचार-विमर्श किया । बीएचयू के स्वतंत्रता भवन सभागार में रविवार से कला-साहित्य प्रेमियों का तीन दिवसीय (17-19 नवंबर) मेला का हुआ समापन। काशी शब्दोत्सव समारोह पर 2500 युवा और प्रोफेसर विश्व के कल्याण में भारत की संस्कृति के योगदान की बात किया। तीन दिन और 10 सत्रों में 20 से ज्यादा देशों के विद्वान, कला प्रेमी, संत-साहित्यकार, डॉक्टर, आयुर्वेदाचार्य, पर्यावरणविद, पौराणिक व्यक्तित्व, राजनीतिक चिंतक और आरएसएस के सदस्य अपना अनुभव साझा किया।

आयोजक प्रोफेसर शैलेश कुमार मिश्रा ने बताया कि ये तीन दिवस में कुटुंब प्रणाली पर्यावरण वैश्विक संदर्भ प्रबंधन के भारतीय सूत्र इन विषयों पर हम लोगों ने चर्चा की है इसका मूल संदर्भ जो था कला साहित्य और संस्कृति का संगम था इसमें देश के बड़े-बड़े विद्वान पत्रकार कलाकार शिक्षाविद ये आए और छात्रों के और समाज के विद्वानों विभिन्न लोगों के साथ संवाद किया इसमें लोग अपनी संक्षिप्त प्रस्तुति रखते थे उसके बाद संवाद की प्रकिया रखते है और वार्तालाभ होता है वार्तालाभ का समस्या रिकॉर्डिंग की जा रही है एक प्रकार से समाज को झकझोरने का प्रयास है जो हमारे पर्यावरण के विषय है कुटुंब का विषय है समाज का विषय है और देश की जो चुनौतियां है विश्व की चुनौतियां है इन सबको को लेकर समाज में एक जागृति पैदा करने का उद्देश्य है।








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