बांदा की मिट्टी से निकली ताक़त शालिनी सिंह पटेल का नाम गूंजा उत्तर से दक्षिण और विदेशों तक

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बांदा-     की मिट्टी से उठी आवाज़ आज उत्तर से लेकर दक्षिण भारत और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक गूंज रही है। जनता दल यूनाइटेड की प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल ने अपने संघर्ष, मेहनत और साहस से यह साबित किया है कि अगर इरादे सच्चे हों और मेहनत लगातार हो, तो एक जनपद की बेटी भी देश और दुनिया में अपनी पहचान बना सकती है। शालिनी सिंह पटेल ने राजनीति को सत्ता का साधन नहीं, जनसेवा का संकल्प बनाया है। उनके लिए राजनीति सिर्फ पद और शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता की समस्याओं को सुनना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और उनके हित में निर्णय लेना है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों पर आवाज़ उठाई जिन पर बोलने से कई लोग डरते हैं — भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अत्याचार, महिला उत्पीड़न और सामाजिक अन्याय।

उनकी निर्भीकता और संघर्षशीलता ने उन्हें न केवल बुंदेलखंड बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, झारखंड और तमिलनाडु सहित पूरे भारत में पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व और प्रतिबद्धता के कारण उन्हें क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। फरवरी 2024 में नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में, जिसमें 192 देशों के सामाजिक संगठन और नेता शामिल थे, शालिनी सिंह पटेल ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह सम्मेलन SC, ST और OBC समुदायों के अधिकार और सामाजिक समावेशिता पर केंद्रित था। मंच पर उनके भाषण ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को प्रभावित किया और भारत की महिला नेतृत्व क्षमता को उजागर किया।

उन्होंने भ्रष्टाचार, प्रशासनिक दमन और महिला उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मुद्दों पर निर्भीक आवाज़ उठाई। उनका दृष्टिकोण उनके नेतृत्व को मजबूत बनाता है और लोगों में यह विश्वास जगाता है कि जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी बाधा को सहन किया जा सकता है। शालिनी सिंह पटेल की यह यात्रा सिर्फ व्यक्तिगत सफलता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार हो, तो कोई भी युवा या लड़की देश और दुनिया में अपना नाम रौशन कर सकती है। उनके शब्दों में — “नेता वही जो जनता के अधिकारों की रक्षा को अपनी जिम्मेदारी समझे और सच्चाई की आवाज़ को किसी भी चुनौती से नहीं दबने दे।” बांदा की यह बहादुर, मेहनती और संघर्षशील बेटी आज देश और विदेशों में प्रेरणा की मिसाल बन चुकी हैं।

उनका जीवन यह संदेश देता है कि ईमानदार नेतृत्व, साहस और लगातार मेहनत से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है और समाज में बदलाव लाया जा सकता है। शालिनी सिंह पटेल का संघर्ष और उनकी प्रतिबद्धता न केवल राजनीतिक नेतृत्व के लिए, बल्कि महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए भी प्रेरणा बन गई है। उनका काम यह दिखाता है कि सच्चाई और मेहनत की आवाज़ को कोई दबा नहीं सकता, चाहे चुनौती कितनी भी बड़ी क्यों न हो। बांदा की यह बहादुर बेटी आज पूरे भारत और विश्व में संघर्ष, साहस और जनहित की मिसाल बन चुकी हैं — और आने वाला समय उनके नेतृत्व को और अधिक प्रभावशाली रूप में देखेगा।

 

रिपोर्ट- सुनील यादव

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