मानिकपुर नगर पंचायत में निर्वाचित अध्यक्ष के स्थान पर उनके पुत्र द्वारा कार्यालय संचालन और प्रशासनिक कार्यों में कथित हस्तक्षेप का मामला अब शासन, जिलाधिकारी और नगर विकास विभाग तक पहुंच गया है। उपलब्ध दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि इस मामले में कई स्तरों पर पत्राचार हुआ और जांच आख्या मांगी गई।
प्राप्त आदेशों के अनुसार, नेशनल एंटी करप्शन एंड ऑपरेशन कमेटी ऑफ इंडिया के प्रदेश उपाध्यक्ष अजय कुमार मिश्र द्वारा शिकायत की गई थी कि नगर पंचायत मानिकपुर की निर्वाचित अध्यक्ष चन्द्रलता जायसवाल के पुत्र आशुतोष जायसवाल (हिमु) नगर पंचायत कार्यालय में चेयरमैन की कुर्सी पर बैठकर कर्मचारियों को निर्देश देते हैं तथा प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए नगर विकास अनुभाग-1, लखनऊ ने 31 जनवरी 2025 को जिलाधिकारी प्रतापगढ़ को पत्र भेजकर मामले की जांच कर तथ्यात्मक आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय से भी संबंधित अधिकारियों को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए गए।
ईओ ने लिखित रूप से लगाए गंभीर आरोप
नगर पंचायत मानिकपुर के अधिशासी अधिकारी द्वारा शासन को भेजे गए पत्र में दावा किया गया कि अध्यक्ष के अधिकांश कार्य उनके पुत्र आशुतोष जायसवाल द्वारा किए जाते हैं। पत्र में यह भी उल्लेख है कि कार्यालय में चेयरमैन की कुर्सी पर बैठकर कर्मचारियों को आदेश दिए जाते हैं और विरोध करने वाले कर्मचारियों को कथित रूप से धमकाया जाता है।
ईओ ने अपने पत्र में यहां तक लिखा कि नगर पंचायत के निर्णयों में भी आशुतोष जायसवाल की भूमिका प्रभावी रहती है और निर्वाचित अध्यक्ष स्वयं बहुत कम कार्यालय आती हैं। पत्र में शिकायतकर्ता के आरोपों को “पूर्ण रूप से सत्य” बताया गया है।
जिलाधिकारी और एडीएम ने मांगी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी कार्यालय से उप जिलाधिकारी कुंडा तथा नगर पंचायत प्रशासन को जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। बाद में उप जिलाधिकारी कुंडा ने भी अधिशासी अधिकारी से स्पष्ट आख्या मांगी और यह उल्लेख किया कि पूर्व में मांगी गई रिपोर्ट समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई थी।
फरवरी 2025 में प्रभारी अपर जिलाधिकारी (स्थानीय निकाय) ने भी एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट और संस्तुति उपलब्ध कराने का निर्देश जारी किया।
दस्तावेजों में फोटो और साक्ष्य का दावा
शिकायत पत्र में दावा किया गया कि शिकायतकर्ता स्वयं नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे थे, जहां कथित रूप से अध्यक्ष पुत्र चेयरमैन की कुर्सी पर बैठे मिले। शिकायत के साथ फोटो और वीडियो साक्ष्य होने का भी उल्लेख किया गया है।
बड़ा सवाल क्या ‘प्रतिनिधि संस्कृति’ पर लगेगी लगाम?
पंचायती राज और स्थानीय निकायों में लंबे समय से “प्रधान पति”, “चेयरमैन प्रतिनिधि” और “परिजन प्रतिनिधि” संस्कृति पर सवाल उठते रहे हैं। नियमों के अनुसार प्रशासनिक अधिकार केवल निर्वाचित पदाधिकारी और अधिकृत अधिकारियों को ही प्राप्त होते हैं। ऐसे में यदि कोई गैर-पदेन व्यक्ति कार्यालय संचालन या प्रशासनिक निर्णयों में हस्तक्षेप करता है तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय माना जाता है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन और जिला प्रशासन इस मामले में अंतिम जांच रिपोर्ट के आधार पर क्या कार्रवाई करते हैं। दस्तावेजों से इतना स्पष्ट है कि मामला केवल स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि शासन स्तर तक पहुंच चुका है और संबंधित अधिकारियों से कई बार स्पष्टीकरण एवं जांच आख्या मांगी जा चुकी है।











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