चंदौली में आखिर वह हो गया जिसकी चर्चा लंबे समय से चाय की दुकानों से लेकर फरियादियों की फाइलों तक घूम रही थी। दरोगा संजय कुमार को एसपी ने लाइन हाजिर कर दिया। विभागीय जांच भी बैठा दी गई। बस फिर क्या था… पूरे महकमे में अचानक अनुशासन का रक्तचाप बढ़ गया।
गुस्ताखी माफ हुजूर…
खाकी में कुछ लोग शायद यह भूल बैठे थे कि थाना कोई निजी जागीर नहीं होता। जनता शिकायत लेकर आए और उसे घंटों बैठाकर रखा जाए, फोन उठाना एहसान समझा जाए, और जिम्मेदारी को कुर्सी के नीचे दबाकर रखा जाए — यह बीमारी अब पुरानी हो चुकी है।
लेकिन *इस बार एसएसपी की कलम ने बता दिया कि हर शिकायत फाइल में दबाने के लिए नहीं होती,अब सख्त कार्रवाई होगी।
पुलिस महकमे में अब दिलचस्प माहौल है।
जो लोग कल तक फरियादियों को “कल आना” कहकर टरकाते थे, आज वही लाइन ऑफिस में हाजिरी लगाते नजर आ रहे हैं। थानों में अचानक कुर्सियां सीधी हो गई हैं, मोबाइल की घंटियां उठने लगी हैं और कुछ पुलिसकर्मी तो जनता को देखकर मुस्कुराने की प्रैक्टिस भी करते दिख रहे हैं।
चंदौली की जनता कह रही है— अगर इसी तरह जवाबदेही तय होती रही तो शायद थानों का डर कम और भरोसा ज्यादा बढ़ेगा।
एसपी की यह कार्रवाई सिर्फ दो पुलिसकर्मियों पर गाज नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को संदेश है कि खाकी का रौब जनता की सेवा से बड़ा नहीं हो सकता।
कभी-कभी पुलिस लाइन ही वह जगह बन जाती है जहां कुछ लोगों को याद दिलाया जाता है कि वर्दी सत्ता नहीं, जिम्मेदारी होती है।











Users Today : 76
Users This Year : 15643
Total Users : 28236
Views Today : 194
Total views : 56102