कौशांबी।
अपराधी अक्सर यह सोचकर वारदात को अंजाम देते हैं कि शव छिपा देने या सबूत मिटा देने से वे कानून की पकड़ से बच जाएंगे, लेकिन जब जांच की कमान पैनी नजर और तकनीकी समझ रखने वाले अधिकारी के हाथ में हो, तो मामूली सुराग भी बड़े खुलासे की वजह बन जाते हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया सत्य नारायण ने, जिनकी निगरानी में कौशांबी और मुजफ्फरनगर के दो ब्लाइंड मर्डर केस चौंकाने वाले तरीके से सुलझाए गए।
कौशांबी केस: दुपट्टे पर चिपका बारकोड बना ‘गेम चेंजर’
कोखराज थाना क्षेत्र में 15 अप्रैल को हाईवे किनारे एक बक्से में बंद अज्ञात महिला का शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। शव की पहचान नहीं हो पा रही थी और मामला पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर बन चुका था।
घटनास्थल पर जांच के दौरान पुलिस को शव पर लिपटे दुपट्टे में बीयर का बारकोड चिपका मिला। यह छोटा सा सुराग एसपी सत्य नारायण की नजर से बच नहीं पाया। तकनीकी जांच के जरिए इसी बारकोड के आधार पर मृतका की पहचान मोनी वर्मा के रूप में हुई।
जांच आगे बढ़ने पर शक मृतका के पति हर्ष खियानी पर गया। सख्ती से पूछताछ में उसने अपना अपराध कबूल लिया। आरोपी ने बताया कि मोनी उसकी दूसरी पत्नी थी और वह उसे घर ले जाने का दबाव बना रही थी। पारिवारिक विवाद और बदनामी के डर से उसने गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद दोस्त की मदद से शव को बक्से में बंद कर कानपुर से कौशांबी लाकर फेंक दिया। लेकिन बारकोड की छोटी सी कड़ी ने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया।
मुजफ्फरनगर केस: शराब के पउए ने खोला राज
मुजफ्फरनगर के चर्चित कुलदीप हत्याकांड में भी आरोपियों ने शव को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश की थी। लेकिन घटनास्थल से बरामद एक शराब के खाली पउए ने पुलिस को अहम दिशा दी।
उस पउए पर दर्ज ठेके के नंबर के आधार पर संबंधित शराब दुकान की पहचान की गई। वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर पुलिस सीधे आरोपियों तक पहुंच गई और पूरे हत्याकांड का खुलासा हो गया।
छोटे सुराग, बड़ा खुलासा
दोनों मामलों में एक बात समान रही—अपराधियों ने बड़े स्तर पर सबूत मिटाने की कोशिश की, लेकिन छोटी-सी चूक उनके लिए भारी पड़ गई। बारकोड और पउए का नंबर जैसे मामूली सुराग पुलिस के लिए मजबूत हथियार बन गए।
एसपी की कार्यशैली बनी चर्चा
सत्य नारायण की जांच शैली अब चर्चा का विषय बन चुकी है। उनकी बारीकी से जांच करने की क्षमता और तकनीकी साक्ष्यों के प्रभावी इस्तेमाल ने यह साबित कर दिया कि अब अपराधियों के लिए बच निकलना आसान नहीं है।
संदेश साफ: अब बचना मुश्किल
इन दोनों मामलों के खुलासे ने यह साफ कर दिया है कि अब जांच केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि गहराई और तकनीक के साथ की जा रही है। ऐसे में अपराधियों के लिए हत्या कर बच निकलना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है।











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