बांदा की मधु-सखियाँ शहद की मिठास से संवार रहीं अपनी तकदीर, 1200 रुपए किलो तक बिक रहा शहद

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बांदा: 7 मार्च-

बुंदेलखंड की साहसी महिलाओं ने अब ‘मीठी क्रांति’ के जरिए आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़कर बांदा जिले के छह ब्लॉकों की महिलाओं ने मधुमक्खी पालन को अपनी आय का जरिया बना लिया है। ये महिलाएँ न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं बल्कि समाज के लिए महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर भी उभरी हैं। मधुमक्खी पालन की सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फरवरी में लगाए गए मात्र 75 बॉक्स से एक ही हफ्ते में 36 किलो शहद प्राप्त किया गया। वहीं वर्तमान में जिले की 125 महिलाएं इस काम को लगन से कर रही हैं।

नरैनी क्षेत्र के नीबी व सढ़ा गांव से हुई मधुमक्खी पालन की शुरुवात

इस मुहिम की शुरुवात नरैनी क्षेत्र के नीबी व सढ़ा से फरवरी के महीने में हुई। जहां नीबी गांव की मुन्नीबाई और चुन्नी, वहीं सढ़ा गांव की उमा, ऊषा, जनकदुलारी, सुंता और सुमन जैसी जिले के अन्य क्षेत्रों की सैकड़ों महिलाएँ अपनी सफलता की मिसाल पेश कर रही हैं। विभाग द्वारा बॉक्स मिलने और डीआईआरडी (DIRD) से प्रशिक्षण लेने के बाद इन महिलाओं के हाथ अब हुनरमंद हो चुके हैं और ये महिलाएं घर घर शुद्ध शहद पहुंचा रही हैं।

शहद की अलग-अलग खुशबू व स्वाद और महिलाओं की बढ़ती आमदनी

इन महिलाओं के मुनाफे की बात करें तो अलग-अलग फूलों के हिसाब से शहद की कीमतें भी शानदार मिल रही हैं। जिसके क्रम में जहां सरसों का शहद ₹600 प्रति किलो बिकता है तो वहीं नीम का शहद ₹1000 प्रति किलो, जामुन का शहद ₹800 प्रति किलो तो वहीं वन तुलसी का शहद ₹1200 प्रति किलो (सबसे अधिक मांग) बिकता है।

सरकारी ऋण बना महिलाओं का ढाल

आर्थिक तंगी को पीछे छोड़ने के लिए इन समूहों को राष्ट्रीय आजीविका मिशन के अंतर्गत 25,780 रुपये का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस छोटी सी मदद और अपने बड़े हौसले के दम पर ये महिलाएं शून्य से शिखर तक का सफर तय करने की ओर अग्रसर है।

फार्म आजीविका मिशन के जिला मिशन प्रबंधक सुनील कुमार सिंह ने बताया कि बांदा की ये महिलाएं आज साबित कर रही हैं कि ग्रामीण परिवेश की महिलाएँ भी अगर ठान लें तो तकनीकी ज्ञान और सरकारी सहयोग से अपना खुद का साम्राज्य खड़ा कर सकती हैं। यह बात केवल मुनाफे की नहीं है। बल्कि उन हजारों महिलाओं के सपनों की है जो अब अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और परिवार को अच्छी जीवनशैली देने में सक्षम हैं। इन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले में 125 महिलाएं मधुमक्खी पालन कर रही हैं। जिसमें सबसे अधिक संख्या नरैनी क्षेत्र में महिलाओं की है।

 

रिपोर्ट – सुनील यादव

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