“कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं ह्रदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।”

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“कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं ह्रदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।”

(अर्थ )-
कर्पूर के समान श्वेत रंग वाले , करुणा के अवतार , संसार के सारतत्व , सर्पराज को गले का हार बनाने वाले , पार्वती के साथ हमेशा ह्रदयकमल में रहने वाले भगवान् शंकर को हम नमस्कार करते है।

“करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा
श्रवणनयनजं वा मानसं वाऽपराधम्
विदितमविदितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व
जय जय करुणाब्धे ! श्री महादेव ! शम्भो !”

(अर्थ )-
हे महादेव ! हाथ , पैर , वाणी , शरीर , कर्म , कान , नेत्र आदि ज्ञानेन्द्रियों या मन से जानकर या अनजाने में किये हुये सभी अपराधों को आप क्षमा कीजिये! हे करुणासागर महादेव ! आपकी सदा जय हो!

 

रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला

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