कलम नहीं तो पत्रकारिता नहीं: राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग का दो टूक फरमान (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष)

Picture of voiceofshaurya@gmail.com

voiceofshaurya@gmail.com

FOLLOW US:

Share

नई दिल्ली

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग ने पत्रकारिता के गिरते स्तर और बढ़ती दिखावटी प्रवृत्तियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक स्पष्ट और साहसिक संदेश दिया है। आयोग का कहना है। कि जो पत्रकार कलम चलाना नहीं जानता, उसे पत्रकारिता छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि पत्रकारिता का चौथा स्तंभ कलमकारों के लिए है। न कि शायरबाज़ों और दिखावे के कलाकारों के लिए।

आयोग ने साफ शब्दों में कहा है। कि पत्रकारिता मंच, तुकबंदी, नारेबाज़ी या व्यक्तिगत प्रचार का अखाड़ा नहीं है। यह वह क्षेत्र है। जहाँ सच, साहस और सटीक शब्दों की धार होनी चाहिए। जो व्यक्ति कलम की जिम्मेदारी नहीं समझता, वह इस पवित्र पेशे के साथ न्याय नहीं कर सकता।

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग का मानना है। कि आज पत्रकारिता को सबसे बड़ा खतरा बाहरी नहीं, बल्कि भीतर से खोखली होती सोच है। ऐसे में आयोग देशभर के सच्चे कलमकारों को एक मंच पर लाकर खड़ा करने का अभियान चला रहा है। ताकि पत्रकारिता की असली पहचान और गरिमा को दोबारा स्थापित किया जा सके।

आयोग के अनुसार, चौथा स्तंभ वही मजबूत रख सकता है। जिसकी कलम में सच की स्याही, सवालों की धार और समाज के प्रति जिम्मेदारी हो।

इस फरमान के बाद पत्रकारिता जगत में हलचल तेज हो गई है। कई पत्रकारों ने इसे समय की मांग बताया है। तो कई लोग इसे आत्मशुद्धि का आह्वान मान रहे हैं। आयोग का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब पत्रकारिता में नाम नहीं, काम चलेगा।
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है। कि आने वाले समय में वही पत्रकार और संगठन आगे बढ़ेंगे,
जो लिख सकते हैं, सवाल कर सकते हैं और सत्ता से आंख में आंख डालकर बात कर सकते हैं।

यह सिर्फ़ एक चेतावनी नहीं यह पत्रकारिता के भविष्य को बचाने की आख़िरी घंटी है। अब फैसला हर पत्रकार को खुद करना है।
कलमकार बनना है, या भीड़ का हिस्सा रहना है।

 

 

रिपोर्ट – सुरेश कुमार शर्मा

 

 

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई