‘ लेडी सिंघम’ का मास्टरस्ट्रोक : काशी में पहली बार 400 जांबाज बेटियां संभालेंगी गणतंत्र दिवस की कमान

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वाराणसी इस बार गणतंत्र दिवस पर धर्म और संस्कृति की नगरी काशी एक ऐसे स्वर्णिम इतिहास की गवाह बनने जा रही है, जो पूरे उत्तर प्रदेश के लिए मिसाल बनेगा। वरुणा जोन की एडीसीपी और ‘ लेडी सिंघम ‘ के नाम से मशहूर नीतू काद्दयान की देखरेख में वाराणसी पुलिस ‘ऑल वुमेन पुलिस परेड’ के जरिए महिला सशक्तिकरण का शंखनाद करने के लिए तैयार है।

इतिहास रचेगी ‘ऑल वुमेन परेड’
यूपी के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब गणतंत्र दिवस की पूरी परेड केवल महिलाओं के शौर्य को समर्पित होगी। अब तक की परंपराओं को तोड़ते हुए, इस बार परेड के हर दस्ते में सिर्फ नारी शक्ति नजर आएगी।
इस ऐतिहासिक पहल की सूत्रधार एडीसीपी लेडी सिंघम नीतू काद्दयान ने बताया कि :
* नेतृत्व : परेड की कमान प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी मानसी सिंह के हाथों में होगी।
* सहभागिता : वाराणसी में तैनात और प्रशिक्षण ले रही कुल 400 महिला पुलिसकर्मी इस गौरवशाली परेड का हिस्सा बनेंगी।
* विविधता: परेड में घुड़सवार दस्ता, स्कूटी दस्ता, डायल 112, फायर यूनिट और ट्रैफिक पुलिस की टुकड़ियां शामिल होंगी।
* मुख्य आकर्षण : विशेष महिला कमांडो दस्ता, जो अपनी जांबाजी से समाज को सुरक्षा का भरोसा दिलाएगा।
“संरक्षण नहीं, सुरक्षा देने वाली शक्ति हैं महिलाएं” -लेडी सिंघम
एडीसीपी नीतू काद्दयान, जिन्हें उनकी कार्यशैली के कारण जनता ‘लेडी सिंघम’ पुकारती है, इस आयोजन के जरिए समाज की सोच बदलना चाहती हैं। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि महिलाएं केवल सुरक्षा की पात्र (Protected) नहीं हैं, बल्कि वे खुद सक्षम रक्षक (Protector) हैं।
> “इस परेड का उद्देश्य महिलाओं के प्रति समाज में व्याप्त हीन भावना को जड़ से खत्म करना है। हम यह दिखाना चाहते हैं कि काशी की बेटियां मन, क्रम और वचन से देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”
> — लेडी सिंघम नीतू काद्दयान (ADCP, वरुणा जोन )
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पुलिस कमिश्नर के मार्गदर्शन में बड़ी पहल
यह पूरा आयोजन पुलिस आयुक्त के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। लेडी सिंघम नीतू काद्दयान के नेतृत्व में तैयार हो रही यह फोर्स न केवल परेड ग्राउंड पर कदमताल करेगी, बल्कि आधी आबादी के आत्मविश्वास को एक नई उड़ान भी देगी। काशी के आसमान में इस बार जब इन 400 बेटियों की दहाड़ गूंजेगी, तो वह बदलते भारत की नई तस्वीर पेश करेगी।

 

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी

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