हमारा लोकतंत्र चार मजबूत स्तंभों पर टिका हुआ है। विधायिका कानून निर्माण का कार्य करती है, कार्यपालिका उन कानूनों को लागू करने की जिम्मेदारी निभाती है और न्यायपालिका यह सुनिश्चित करती है कि कानून संविधान तथा जनता के हितों के अनुरूप हों। इन तीनों स्तंभों के साथ लोकतंत्र का चौथा और अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ पत्रकारिता है, जो निष्पक्ष भाव से सत्ता से प्रश्न पूछकर जनता की आवाज़ को मजबूती देती है।
पिछले कुछ वर्षों में यह स्पष्ट रूप से महसूस किया गया है कि पत्रकारों की भूमिका जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही उनकी सुरक्षा, स्वतंत्रता और सम्मान को लेकर चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं। यदि पत्रकारों को एक मजबूत, भरोसेमंद और संगठित समर्थन प्रणाली उपलब्ध हो, तो वे और अधिक निर्भीक, निडर और निष्पक्ष होकर लोकतंत्र की सेवा कर सकते हैं। इसी आवश्यकता ने एक संगठित पहल को जन्म दिया।
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के गठन के पीछे वरिष्ठ पत्रकार निशिकांत जी का दूरदर्शी संकल्प और संवेदनशील नेतृत्व है। निशिकांत जी स्वयं पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं और पत्रकारों के अधिकारों, सुरक्षा तथा सम्मान के लिए लगातार आवाज़ उठाते रहे हैं। उनका जीवन सादा जीवन–उच्च विचार की मिसाल है, जहाँ आध्यात्मिक सोच, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी का स्पष्ट समन्वय दिखाई देता है। पत्रकार समाज के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता ही इस आयोग की वैचारिक शक्ति और नैतिक आधार है। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता को संस्थागत संरक्षण देने की उनकी पहल पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।
यह आयोग केवल पत्रकारों के लिए ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए भी एक महत्वपूर्ण पहल है। आज के समय में, जब पत्रकार विभिन्न प्रकार के दबावों, असुरक्षाओं और चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, ऐसे में यह मंच उन्हें एकजुट करने, उनकी आवाज़ को सशक्त बनाने और निडर पत्रकारिता को संरक्षित करने का कार्य करेगा।
इसी व्यापक सोच और उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग ने अपनी संगठनात्मक संरचना को और अधिक मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। आयोग का लक्ष्य केवल विचार प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि एक ऐसा प्रभावी संस्थागत ढांचा विकसित करना है, जो पत्रकारों की सुरक्षा, अधिकारों और स्वतंत्रता को व्यवहारिक स्तर पर सुनिश्चित कर सके।
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी का विस्तार करते हुए इसे और अधिक सशक्त बनाया है। पत्रकारों की सुरक्षा, अधिकारों की रक्षा तथा उनके लिए अनुकूल और सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोग ने प्रशासनिक, पुलिस, तकनीकी और शैक्षणिक पृष्ठभूमि से जुड़े अनुभवी वर्ग को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी हैं। इन प्रयासों से यह स्पष्ट होता है कि आयोग निष्पक्ष, निर्भीक और उत्तरदायी पत्रकारिता की रक्षा के लिए एक मजबूत, व्यावहारिक और दीर्घकालिक व्यवस्था खड़ी करने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।











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