आजमगढ़।
नाबालिगों के खिलाफ अपराध के दो अलग-अलग मामलों में पॉक्सो कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों को कारावास की सजा सुनाई है। गुरुवार को सुनाए गए फैसले में अदालत ने अपहरण व दुष्कर्म के मामले में एक आरोपी को सात वर्ष के सश्रम कारावास और आठ हजार रुपये अर्थदंड, जबकि मंदबुद्धि बालिका से छेड़छाड़ के मामले में दूसरे आरोपी को तीन वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी।
2013 के अपहरण-दुष्कर्म मामले में फैसला
अभियोजन के अनुसार, शहर कोतवाली क्षेत्र के रैदोपुर की एक नाबालिग किशोरी 9 मार्च 2013 को स्कूल गई थी, लेकिन शाम तक घर नहीं लौटी। इसके बाद पीड़िता की मां ने पुलिस लाइन निवासी रामानंद राजभर के खिलाफ अपहरण का नामजद मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की। विशेष लोक अभियोजक अवधेश कुमार मिश्रा और दौलत यादव ने आठ गवाहों को अदालत में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पॉक्सो कोर्ट के जज संतोष कुमार यादव ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष की सश्रम कैद और आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
डॉक्टर को भी मिली सजा
इसी अदालत ने बिलरियागंज थाना क्षेत्र के एक अन्य मामले में भी निर्णय सुनाया। 11 वर्षीय मंदबुद्धि बालिका को उसके पिता इलाज के लिए मानपुर निवासी डॉक्टर राकेश लाल श्रीवास्तव के क्लिनिक पर लेकर गए थे। आवश्यक कार्य से पिता के बाहर जाने पर आरोपी ने बालिका के साथ छेड़छाड़ की।
अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। साक्ष्यों और बहस के आधार पर अदालत ने आरोपी राकेश लाल श्रीवास्तव को तीन वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
अदालत का संदेश स्पष्ट — नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और उनके खिलाफ अपराध करने वालों को कानून के तहत कठोर दंड दिया जाएगा।









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