गलिमापुर में बदलाव की लहर, जय चौहान बने जनता की पहली पसंद।

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चन्दौली चकिया

ग्राम सभा गलिमापुर में अब बदलाव तय है। वर्षों से उपेक्षा, टूटे वादों और झूठे आश्वासनों से त्रस्त ग्रामवासी इस बार निर्णायक लड़ाई के मूड में हैं। इसी बदलाव की अलख जगा रहे हैं युवा प्रधान पद के भावी प्रत्याशी जय चौहान पुत्र रामअवध।

जय चौहान कोई दिखावटी नेता नहीं, बल्कि गांव की मिट्टी से निकला हुआ जुझारू युवा है, जो तन–मन–धन से ग्राम सभा को विकास की मुख्यधारा में लाने का संकल्प लेकर मैदान में उतरा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, नाली, पानी, बिजली और रोजगार—हर मुद्दे पर उनकी सोच साफ है और इरादे फौलादी।

नारे गूंज रहे हैं गलिमापुर की गलियों में

जो हर दुख में साथ खड़ा — वही प्रधान बनेगा!
जो गांव का बेटा — वही गांव का नेता!
भाषण नहीं, काम चाहिए — जय चौहान प्रधान चाहिए!
टूटे वादों का हिसाब लो — जय चौहान को चुन लो!
अबकी बार विकास तय है — जय चौहान प्रधान तय है!

जय चौहान ने साफ शब्दों में कहा है—।

“प्रधान बनकर नहीं, सेवक बनकर काम करूंगा।”

गांव का बच्चा-बच्चा जानता है कि जय चौहान सुख में साथ और दुख में ढाल बनकर खड़े रहने वाला नाम है। गरीब हो या मजबूर, किसान हो या नौजवान—हर वर्ग की आवाज़ को मजबूती से उठाने वाला प्रत्याशी आज गलिमापुर में लाखों में एक है।

अब गांव पूछ रहा है— जय चौहान।
जो हमेशा साथ खड़ा रहा, _ जय चौहान।
जो हर दर्द में कंधा बना,_ जय चौहान।
जो विकास की बात करता नहीं, करके दिखाने का माद्दा रखता है—जय चौहान।
उसे जिताना नहीं, तो और किसे_ जय चौहान।

ग्रामवासियों से पुरज़ोर अपील है कि वे अपने अपने बेटे, अपने छोटे भाई जय चौहान को आशीर्वाद दें और रिकॉर्ड मतों से विजयी बनाकर गलिमापुर में विकास, सम्मान और स्वाभिमान की नई इबारत लिखें।

इस बार वोट जय चौहान को —

क्योंकि अब गलिमापुर को भाषण नहीं, बदलाव चाहिए।
अबकी बार, मजबूत प्रधान — जय चौहान चाहिए

 

 

रिपोर्ट – अलीम हाशमी

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