मिर्जामुराद
गौर गांव (मिर्जामुराद) स्थित वंशनारायण सिंह महिला महाविद्यालय में दिवंगत शौरभ सिंह की जयंती पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को कथावाचक पंडित परम् पूज्य आनंद मिश्रा ‘पाराशर’ जी भागवत कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र में, कथावाचक श्रीकृष्ण और सुदामा की निस्वार्थ मित्रता और भक्ति का वर्णन करते हैं।
इसमें बताया जाता है कि कैसे सुदामा अपनी गरीबी के बावजूद भी कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे, और कृष्ण ने नंगे पैर दौड़कर उनका स्वागत किया। कृष्ण ने सुदामा की दीन-हीन दशा को देखकर उन्हें गले लगाया और अपने आंसुओं से उनके पैर धोए। कथा का मुख्य संदेश यह है कि सच्ची मित्रता और भक्ति बिना किसी स्वार्थ के होनी चाहिए, और भगवान अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण की कृपा से सुदामा को वैभव प्राप्त हुआ, लेकिन उन्होंने अपनी झोपड़ी में रहकर ही भगवान का स्मरण किया।सुदामा और कृष्ण की मित्रता को सच्ची और निस्वार्थ मित्रता का प्रतीक बताया और बोले कि जो जाति, धर्म या धन से परे है।कथा के अंतिम दिन काफी संख्या में महिला, पुरुष व नवयुवक पंडाल में मौजूद रहे और भगवान कृष्ण व सुदामा की मित्रता की कहानी सुनकर मग्न हो उठे।
इस अवसर पर सुरेश सिंह गौतम, प्रेम नाथ तिवारी, संजीव सिंह गौतम, सविता सिंह, डॉ. आशुतोष उपाध्याय, योगेश सिंह, कृष्णा सिंह, अभिषेक त्रिपाठी ‘सुमित’, सौम्या सिंह, शालू सिंह, डॉ. अंजना सिंह, डॉ. संगीता सिंह, गौरव उपाध्याय, डॉ. विजय सिंह, मुकेश यादव, संगीता, स्नेहा मिश्रा, राजेश सिंह, वीरेंद्र विश्वकर्मा, रामजी यादव समेत समस्त लोग मौजूद रहे।संगीताचार्य में अंकित मिश्रा, मयंक पांडेय, अभिनव पांडेय, विपिन पांडेय व यश त्रिपाठी रहे।
रिपोर्ट – विजयलक्ष्मी तिवारी










Users Today : 47
Users This Year : 6385
Total Users : 18978
Views Today : 158
Total views : 37570