वाराणसी साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर नकेल कसने के लिए पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कमिश्नरेट वाराणसी में सोमवार को एक अहम समीक्षा बैठक की। बैठक में कॉल सेंटर, सिम विक्रेताओं और म्यूल अकाउंट्स पर निगरानी को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए।
अब जिले में संचालित सभी कॉल सेंटरों को अपने संचालक, कर्मचारी, पता, कार्य उद्देश्य और टेलीफोन नंबरों की सूची स्थानीय थाने में अनिवार्य रूप से जमा करनी होगी। पुलिस समय-समय पर इन नंबरों की साइबर क्राइम पोर्टल से जांच करेगी, और किसी भी नंबर से धोखाधड़ी की शिकायत मिलते ही तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फर्जी सिम विक्रेताओं पर गिरेगी गाज
पुलिस आयुक्त ने चेतावनी दी कि जो भी सिम विक्रेता फर्जी नामों पर सिम कार्ड बेचेंगे, और जिन सिमों का उपयोग साइबर ठगी में पाया जाएगा, उन्हें सीधे जेल भेजा जाएगा।
‘म्यूल अकाउंट्स’ की पहचान और फ्रीजिंग अभियान
सभी थाना-स्तरीय साइबर टीमों को आदेश दिया गया है कि ठगी में उपयोग हुए बैंक खातों की पहचान कर डेटाबेस तैयार करें, और संबंधित बैंकों के साथ समन्वय कर उन खातों को तत्काल फ्रीज करें।साथ ही, इन खातों से जुड़े मोबाइल नंबर, ईमेल, UPI IDs, डिजिटल वॉलेट्स और ट्रांजेक्शन डिटेल्स की भी बारीकी से जांच होगी।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि यह अभियान साइबर अपराधों पर निर्णायक वार साबित होगा और वाराणसी में डिजिटल सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।









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