वाराणसी हिंदू मान्यता के अनुसार जिस गोमाता के शरीर में 33 कोटि देवी-देवता का वास होता है, उसकी पूजा गोपाष्टमी पर्व के दिन करने पर इंसान के सारे कष्ट दूर और कामनाएं पूरी होती हैं.
वाराणसी *गोपाष्टमी* के पावन अवसर पर पंचकोसी मार्ग देउरा स्थित आदिशंकराचार्य महासंस्थानम आश्रम में श्री *काशी सुमेरु पीठ के पीठाधीश्वर , जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज* ने पूरे विधि विधान से गौ पूजन अर्चन किया
शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि गौ विश्वस्य माता है। प्राणी मात्र की मां गाय कहलाती है। गाय की सेवा-सुश्रुषा से मनुष्य की मनोवांछित कामनाएं पूर्ण होती हैं। पृथ्वी के सात तत्वों में से, *गोभिर्विप्रैश्च वेदैश्च सतीभिः सत्यवादिभिःअलुब्धैर्दानशीलैश्च सप्तभिर्धार्यते मही ,*
पृथ्वी के रक्षण-संवर्धन में पहला स्थान गाय का है। यज्ञ होगा तो गाय के पंच पदार्थों से होगा। मनुष्य के जन्म के साथ गो-दुग्ध का आहार होता है, और गाय का अंतिम गोदान जब मनुष्य का समय आता है, तो गोदान कर परलोक की यात्रा का मार्ग प्रशस्त होता है। इस धरा में कोई असंभव कार्य नहीं है जो गाय की सेवा से मनुष्य को प्राप्त न हो। जिनको संतान नहीं है, संतान की प्राप्ति हो सकती है। और जिनको धन नहीं है, *धन, वैभव, यश, आदि चतुर्पुरुषार्थों की सिद्धि का आधार गाय* है। इसलिए भारत के हर एक व्यक्ति को एक गाय अवश्य पालना चाहिए जिससे गायों का रक्षण-संवर्धन सुरक्षित रहे।
रिपोर्ट धनेश्वर साहनी










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