आजकल मंडियों और दुकानों में एक बहुत बड़ा, एकदम दूध जैसा सफेद और चमकीला लहसुन बिक रहा है। दिखने में तो यह बहुत सुंदर लगता है और छीलने में भी आसान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह असली लहसुन नहीं, बल्कि चाइनीज लहसुन (Chinese Garlic) है?
भारत सरकार ने इस जहर पर 2014 में ही पूरी तरह बैन (प्रतिबंध) लगा दिया था। लेकिन फिर भी लालची तस्करों और चंद रुपयों के मुनाफे के चक्कर में इसे गैर-कानूनी तरीके से हमारे देश की रसोइयों तक पहुँचाया जा रहा है।
ब्लीचिंग का जहरइस लहसुन को इतना सफेद और चमकीला बनाने के लिए जानलेवा केमिकल्स और ब्लीच से धोया जाता है।
कीटनाशक (Pesticides) इसे सालों-साल सड़ने से बचाने के लिए भारी मात्रा में फफूंदनाशक दवाइयां छिड़की जाती हैं।
बीमारियों का घर यही ब्लीच और केमिकल धीरे-धीरे हमारे शरीर में जमा होकर कैंसर, लिवर फेलियर और किडनी की गंभीर बीमारियों का कारण बन रहे हैं। जिस लहसुन का इस्तेमाल हम बीमारियों से बचने के लिए करते थे, वही आज बीमारी की वजह बन रहा है!
बाजार जाएं तो ऐसे पहचानें असली और जहरीले लहसुन का फर्क
चाइनीज लहसुन बिल्कुल बर्फ जैसा सफेद और चमकीला होगा। जबकि हमारा देसी लहसुन हल्का मटमैला, भूरा या हल्का गुलाबी/बैंगनी छटा लिए होता है।
चाइनीज लहसुन की कलियां एक बराबर और बहुत बड़ी होंगी। देसी लहसुन में कलियां छोटी-बड़ी और प्राकृतिक आकार की होती हैं।
चीनी लहसुन के नीचे का हिस्सा (जड़) पूरी तरह साफ और समतल काट दिया जाता है। देसी लहसुन में नीचे सूखी हुई जड़ें और मिट्टी का हल्का अंश जरूर दिखता है।
देसी लहसुन छीलते ही तेज तीखी खुशबू आती है, जबकि चीनी लहसुन में कोई खास गंध या औषधीय गुण नहीं होते।
दिखावे और सहूलियत के चक्कर में अपने और अपने बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ न करें। थोड़ा मटमैला और छोटा देसी लहसुन ही खरीदें, वही हमारे स्वास्थ्य के लिए वरदान है











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