चन्दौली पड़ाव
बहादुरपुर स्थित कामाख्या निवास के प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण की कथा के षष्ठम दिवस की कथा में व्यास पीठ से पुराण वक्ता अखिलानंद जी महाराज ने शिव भक्तों को नाम की महिमा का वर्णन कर शिव भक्ति में लीन कर दिया। महाराज जी ने कहा कि कलियुग में शिव का नाम ही सर्वोपरि है। नाम जप से जीव शिव सायुज्य को प्राप्त कर लेता हैं।
जिनके मुख में भगवान शिव का नाम है जो अपने मुख से सदाशिव के नाम का उच्चारण करते रहते हैं पाप उनका स्पर्श तक नहीं करता । जब व्यक्ति श्री शिवाय नमस्तुभ्यं अर्थात् हे शिवजी आपको मेरा नमस्कार है ऐसी बात मुंह से निकलती है तब उसका मुख संपूर्ण पापों का नाश करने वाला तीर्थ के समान हो जाता है ।
शिव का नाम भस्म ,रुद्राक्ष , विभूति तीनों त्रिवेणी के समान परम पावन है । तथा त्रिवेणी के समान फल देने वाले हैं । जिनके शरीर में भस्म रुद्राक्ष तथा विभूति यह तीनों वस्तुएं सर्वदा रहती हैं उनके दर्शन मात्र से मनुष्य त्रिवेणी स्नान का फल प्राप्त करता है । भगवान शिव का नाम ही गंगा है विभूति यमुना मानी गई है तथा रुद्राक्ष को पापनाशिनी सरस्वती कहा गया है।
जो शिव नाम रूपी नौका पर आरुढ़ हो संसार रूपी सागर को पार करते हैं उनके जन्म मरणरूप संसार के कारणभूत वे सारे पाप निश्चय ही नष्ट हो जाते हैं । महाराज ने शिव महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शिव ही इस सृष्टि के कर्ता भर्ता और हर्ता है । वही परात्पर हैं परब्रह्म , निर्विकार , सर्वव्यापी , परमात्मा एवं परमेश्वर हैं ।
शिव में अनन्य भाव से निष्ठा रखने वाला जीव अपने मानव जीवन को सफल कर लेता है और शिव कृपा से अभिलंब परम पद को प्राप्त करता है कथा में मुख्य यजमान के रूप में कांति जायसवाल शेखर जायसवाल व निधि जायसवाल रहे।
इस दौरान श्रोता के रूप में अनिल गुप्ता गुड्डू, अजय राठौर,यज्ञ नारायण सिंह , मनोज श्रीवास्तव , खुशबू जायसवाल , ओम प्रकाश जायसवाल , बबीता जायसवाल , विनोद यादव , अंजलि राठौर , अजीत जायसवाल , रवि गुप्ता , अजय चौरसिया , शेखर गुप्ता आदि श्रोताओं ने कथा श्रवण कर भाव विभोर हो गए।











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