जौनपुर
जनपद के थाना जलालपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा उत्तमपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है। जिसने कानून-व्यवस्था और गरीबों को न्याय दिलाने के सरकारी दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। आरोप है। कि एक गरीब परिवार की निजी स्वामित्व वाली भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को जलालपुर पुलिस ने विपक्षियों के साथ मिलकर रुकवा दिया। इतना ही नहीं, पीड़ित परिवार की महिलाओं के साथ मारपीट और प्रताड़ना का भी आरोप लगाया गया है। महिला को लाठी-डंडों से दौड़ा-दौड़ाकर पीटने का वीडियो भी प्रकाश में आया है। जिसने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।
पीड़ित दीपक कुमार पुत्र शिवशंकर निवासी ग्राम सभा उत्तमपुर का आरोप है। कि उनकी निजी भूमि के सभी वैध राजस्व अभिलेख, खतौनी और अन्य दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस ने निष्पक्षता से कार्य करने के बजाय विपक्षियों का साथ दिया और उनके वैध निर्माण कार्य को जबरन बंद करा दिया।
पीड़ित परिवार का आरोप है। कि मौके पर पहुंचे उपनिरीक्षक मोहन प्रसाद ने बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश के निर्माण कार्य को रुकवा दिया तथा परिवार के सदस्यों के साथ अभद्र व्यवहार और प्रताड़ना की। यह भी आरोप है। कि पुलिस की इस कार्रवाई से दबंगों के हौसले इतने बुलंद हो गए कि उन्होंने महिला के साथ मारपीट तक कर डाली।
सबसे बड़ा सवाल यह है। कि यदि जमीन का विवाद राजस्व विभाग के अधिकार क्षेत्र का विषय है। तो स्थानीय पुलिस किस अधिकार से एक पक्ष का समर्थन करते हुए गरीब परिवार के वैध निर्माण कार्य को बाधित कर रही है। क्या जलालपुर पुलिस कानून के अनुसार कार्य कर रही है। या फिर सत्ता और दबंगई के दबाव में गरीबों की आवाज को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार गरीबों, महिलाओं और वंचित वर्ग को न्याय दिलाने की बात करती है। लेकिन यदि जमीनी स्तर पर पुलिस ही गरीबों के अधिकारों की सबसे बड़ी बाधा बन जाए तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए।
यह मामला केवल एक गरीब परिवार की जमीन का नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त समान न्याय के अधिकार का भी है। यदि एक गरीब परिवार अपने ही स्वामित्व की भूमि पर निर्माण कार्य नहीं करा सकता, तो यह कानून के शासन पर एक गंभीर प्रश्न है।
पीड़ित परिवार की प्रमुख मांगें
निजी भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार का अवैध हस्तक्षेप तत्काल रोका जाए।
पीड़ित परिवार को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा प्रदान कर निर्माण कार्य को संपन्न कराया जाए।
महिला के साथ हुई मारपीट की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
उपनिरीक्षक मोहन प्रसाद की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कर उन्हें तत्काल प्रभाव से मामले से अलग किया जाए।
जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक स्वयं इस प्रकरण का संज्ञान लेकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाएं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है। कि क्या गरीबों के लिए कानून अलग है। और दबंगों के लिए अलग क्या जलालपुर पुलिस न्याय की प्रहरी है। या फिर गरीबों के अधिकारों की सबसे बड़ी बाधा।
यदि प्रशासन ने समय रहते इस मामले में निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं की, तो यह केवल एक परिवार के साथ अन्याय नहीं होगा, बल्कि आम जनता के कानून और न्याय व्यवस्था से विश्वास को भी गहरी ठेस पहुंचेगी।
गरीब की आह बहुत भारी होती है। न्याय में जितनी देर होगी, व्यवस्था पर उतने ही बड़े सवाल खड़े होंगे। अब देखना यह है। कि जिला प्रशासन पीड़ित परिवार के आँसू पोंछता है। या फिर दबंगई और पक्षपात के आगे न्याय एक बार फिर बेबस नजर आता है।
यह समाचार पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।










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