जौनपुर
जनपद जौनपुर में आखिर हो क्या रहा है। क्या गरीब, असहाय और लाचार लोगों की जिंदगी अब भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। क्या स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित रह गई है।
जलालपुर थाना क्षेत्र के हरीपुर तिराहा के पास स्थित एक प्रतिष्ठान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है। कि बाहर “यूनियन बैंक ऑफ इंडिया / ग्राहक सेवा केंद्र (Fino Payment Bank)” का बोर्ड लगा है। जबकि उसी परिसर के भीतर कथित रूप से एक क्लिनिक संचालित किया जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह बताई जा रही है।
कि वहां योग्य चिकित्सक की नियमित उपस्थिति संदिग्ध है। और मरीजों को उपचार तथा दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
यदि ये आरोप सत्य हैं। तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सीधे-सीधे मानव जीवन के साथ खिलवाड़ का मामला है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है। कि क्या स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी नहीं है। या जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही यदि एक ही परिसर में बैंकिंग सेवाओं के साथ चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं। तो संबंधित विभागों द्वारा निरीक्षण क्यों नहीं किया गया।
स्थानीय नागरिकों का कहना है। कि गरीब परिवार, जो महंगे अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते, वे ऐसे केंद्रों पर भरोसा करके पहुंचते हैं। लेकिन यदि बिना मान्यता, बिना विशेषज्ञ चिकित्सक और बिना निर्धारित मानकों के उपचार किया जा रहा है। तो किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी।
जौनपुर के लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं।- क्या संबंधित क्लिनिक के पास वैध पंजीकरण और लाइसेंस है।
क्या वहां तैनात व्यक्ति चिकित्सा करने के लिए अधिकृत हैं। क्या स्वास्थ्य विभाग ने कभी इस प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया।
यदि नहीं, तो क्यों। यदि हां, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
यह मामला केवल एक प्रतिष्ठान का नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही का है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं। तो यह प्रशासनिक उदासीनता का गंभीर उदाहरण माना जाएगा।
जनपद जौनपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), जिलाधिकारी एवं पुलिस प्रशासन से मांग की जाती है। कि इस मामले की निष्पक्ष एवं तत्काल जांच कराई जाए। यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं। तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति गरीबों की मजबूरी को अपना व्यवसाय न बना सके।
जौनपुर की जनता जानना चाहती है। क्या कार्रवाई होगी, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद केवल जांच समिति बनाकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
इस समाचार में उल्लिखित आरोप स्थानीय लोगों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उठाए गए प्रश्न हैं। संबंधित विभागों की जांच एवं आधिकारिक पुष्टि के बाद ही अंतिम निष्कर्ष माना जाएगा।)
रिपोर्ट – सुरेश कुमार शर्मा










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