जौनपुर
जनपद में उपभोक्ताओं के अधिकारों से खिलवाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है। कि इस समय सराय पोख्ता चौकी के समीप स्थित एक पेट्रोल पंप पर ग्राहकों से पूरा पैसा लेने के बावजूद वाहनों में निर्धारित मात्रा में पेट्रोल नहीं पहुंच रहा है। इस घटना ने न केवल आम जनता में आक्रोश पैदा कर दिया है। बल्कि जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई वाहन चालक 100 से 200 रुपये तक का पेट्रोल भरवाने के बाद कुछ ही दूरी पर पहुंचते हैं। और उनकी गाड़ियां अचानक बंद हो जाती हैं। इससे आशंका जताई जा रही है। कि कहीं पेट्रोल की मात्रा में गड़बड़ी तो नहीं की जा रही। यदि यह आरोप सही हैं। तो यह सीधे-सीधे उपभोक्ता अधिकारों का हनन और जनता के साथ आर्थिक धोखाधड़ी का मामला बनता है।
ताजा मामला उस समय सामने आया, जब लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) महिला प्रकोष्ठ, जनपद जौनपुर की जिलाध्यक्ष ममता सिंह के वाहन में पेट्रोल भरवाने के कुछ ही देर बाद गाड़ी बंद हो गई। आरोप है। कि शिकायत करने पर पेट्रोल पंप कर्मचारियों में हड़कंप मच गया और मामला बढ़ता देख उन्होंने माफी मांगते हुए दोबारा वाहन में पेट्रोल डाला।
इस घटना के बाद क्षेत्र में कई सवाल गूंज रहे हैं।
क्या पेट्रोल पंप पर माप-तौल में गड़बड़ी की जा रही है। क्या संबंधित विभाग नियमित जांच करने में विफल हो रहा है। यदि आम जनता के साथ ऐसा हो रहा है। तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। आखिर किसके संरक्षण में यह कथित खेल संचालित हो रहा है।
बढ़ती महंगाई के इस दौर में जहां आम नागरिक पहले से आर्थिक बोझ झेल रहा है। वहीं यदि पेट्रोल पंपों पर इस प्रकार की अनियमितताएं हो रही हैं। तो यह बेहद चिंताजनक विषय है। जनता का कहना है। कि यदि समय रहते मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह लोगों के विश्वास को पूरी तरह से तोड़ देगा।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी एवं जिला पूर्ति विभाग से मांग की है। कि मामले की तत्काल जांच कराई जाए, पेट्रोल पंप के माप-तौल उपकरणों की जांच की जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
यह समाचार स्थानीय स्तर पर प्राप्त शिकायतों और आरोपों पर आधारित है। प्रशासनिक जांच के बाद ही तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी। यदि संबंधित पेट्रोल पंप प्रबंधन अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहता है। तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
यह संस्करण प्रभावशाली और पत्रकारिता की दृष्टि से संतुलित है। इसमें आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय जांच की मांग के रूप में रखा गया है। जिससे समाचार की विश्वसनीयता बनी रहे और प्रशासन भी संज्ञान लेने के लिए बाध्य हो।











Users Today : 27
Users This Year : 23638
Total Users : 36231
Views Today : 41
Total views : 71144