काशी की साहित्यिक और सांगीतिक विरासत को मिलेगा नया आयाम, संत रविदास पार्क में बनेगा ‘आनंद कानन गुरुकुल’

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काशी की हजारों वर्षों पुरानी साहित्यिक, सांगीतिक और सांस्कृतिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से वीडीए नगवा स्थित संत रविदास पार्क में ‘आनंद कानन गुरुकुल’ की स्थापना करेगा। प्राचीन ऋषि-आश्रमों की तर्ज पर विकसित होने वाले इस गुरुकुल का डिजाइन तैयार कर लिया गया है तथा परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी बन चुकी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 1 करोड़ 96 लाख 87 हजार 668 रुपये खर्च किए जाएंगे।

गुरुकुल के निर्माण के लिए संत रविदास पार्क में लगभग 6,000 वर्ग फुट क्षेत्र निर्धारित किया गया है। इसमें करीब 4,000 वर्ग फुट क्षेत्र में चार प्रमुख गुरुकुलों का निर्माण होगा, जबकि शेष क्षेत्र को हरित परिसर, खुला मंच और अन्य सुविधाओं के लिए विकसित किया जाएगा।

काशी कथा गुरुकुल होगा सबसे बड़ा केंद्र

परियोजना का सबसे प्रमुख और बड़ा भाग काशी कथा गुरुकुल होगा, जिसका निर्माण लगभग 2,000 वर्ग फुट क्षेत्र में किया जाएगा। यहां साहित्य की सभी प्रमुख विधाओं कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना, लोक साहित्य और अन्य रचनात्मक विधाओं का अध्ययन और प्रशिक्षण कराया जाएगा।

गुरुकुल में एक आकर्षक दीर्घा (गैलरी) भी बनाई जाएगी, जहां काशी की साहित्यिक परंपरा और महान साहित्यकारों से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। इसके मुख्य द्वार के सामने पुस्तक और पंख वाली लेखनी का प्रतीकात्मक शिल्प स्थापित किया जाएगा, जो ज्ञान और सृजनशीलता का संदेश देगा।

नृत्य गुरुकुल में जीवंत होगी भारतीय नृत्य परंपरा

परियोजना में 1,000 वर्ग फुट क्षेत्र में नृत्य गुरुकुल का विकास किया जाएगा। यहां भारतीय शास्त्रीय एवं पारंपरिक नृत्य विधाओं का प्रशिक्षण गुरुकुल परंपरा के अनुरूप दिया जाएगा। नृत्य गुरुकुल के खुले परिसर में नृत्यांगना की आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जो भारतीय नृत्य संस्कृति की गरिमा को दर्शाएगी।

गायन और वादन गुरुकुल भी होंगे आकर्षण का केंद्र

गुरुकुल परिसर में 500-500 वर्ग फुट क्षेत्र में गायन और वादन गुरुकुल विकसित किए जाएंगे। गायन गुरुकुल के सामने हारमोनियम के साथ गायन मुद्रा में बैठे कलाकार की प्रतिमा स्थापित होगी, जबकि वादन गुरुकुल के समक्ष सितार, वीणा और तबले का कलात्मक शिल्प लगाया जाएगा। इन केंद्रों में शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत तथा विभिन्न वाद्ययंत्रों के प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी।

प्राचीन स्वरूप, आधुनिक सुविधाएं

आनंद कानन गुरुकुल का बाहरी स्वरूप प्राचीन ऋषि-आश्रमों की याद दिलाएगा, लेकिन इसके भीतर कला शिक्षा की दृष्टि से आधुनिक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। परिसर में विशेष प्रकाश व्यवस्था, आकर्षक लैंडस्केपिंग, सुगंधित फूलों की फुलवारी तथा शांत वातावरण विकसित किया जाएगा, जिससे साधना और अध्ययन के लिए अनुकूल माहौल तैयार हो सके।

मंडलायुक्त की परिकल्पना

इस परियोजना की परिकल्पना मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने की है। उनकी मंशा है कि काशी में ऐसा सांस्कृतिक केंद्र विकसित हो, जहां गुरुकुल परंपरा को आधुनिक समय के अनुरूप पुनर्जीवित किया जा सके और नई पीढ़ी को साहित्य, संगीत एवं नृत्य की समृद्ध विरासत से जोड़ा जा सके।

सुबह-ए-बनारस आनंद कानन करेगा संचालन

प्रस्तावित गुरुकुल का संचालन नगर की सांस्कृतिक संस्था सुबह-ए-बनारस आनंद कानन के माध्यम से किया जाएगा। यहां नियमित प्रशिक्षण, कार्यशालाएं, सांस्कृतिक आयोजन, साहित्यिक गोष्ठियां और संगीत-नृत्य की प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इससे काशी की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

 

रिपोर्ट धनेश्वर साहनी

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