सैयदराजा (चंदौली)
नगर पंचायत व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इमाम हुसैन की याद में मोहर्रम की दसवीं तारीख शुक्रवार को दर्जनों ताजिया उठाए गए । ताजिया के साथ खलीफा के शागिर्द आगे-आगे अपने गतका, बाना,पाटा, बनेठी से कला का प्रदर्शन करते हुए या हसन या हुसैन की सदाओं के साथ चल रहे थे
इस दौरान जगह-जगह जुलूस रोककर अखाड़ेदरों ने विभिन्न करतबो का प्रदर्शन भी किया। जुलूस मुख्य बाजार से होता हुआ दर्जनों ताजिए वार्ड नं0 3 हसरत मोहानी नगर में पहुंचकर बाकी बनाए गए ताजिए मिलन के पश्चात मोहल्ला बड़ा चौक पहुंचे ।
जहां पांच अखाड़ों के शागिर्दो ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। जहां खलीफाओं के शागिर्दो ने अपने-अपने कला का प्रदर्शन किया । मोहल्ला बड़ा चौक में खेल का प्रदर्शन देखने के लिए काफी संख्या में भीड़ मौजूद रही।
इसके बाद जुलूस के रूप में सभी ताजिए शुक्रवार की देर रात कर्बला पहुंचकर ताजिए के फूल को दफन किया गया। कारी शमशाद खान् ने कहा कि आशूरा का दिन मोहर्रम का सबसे खास दिन होता है।
इसी दिन पैगंबर साहब के नवासे इमाम हुसैन कर्बला में शहीद हुए थे। अल्लाह की राह में जो लोग कर्बला की सर जमीन पर यजीद से जंग के दौरान अल्लाह की राह में जो लोग शहीद हो गए ।वह मरे नहीं हैं बल्कि जिंदा हैं।
इस दौरान प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार मिश्र सहित हमराही एवं काफी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात रहे।
इस अवसर पर हमीद सिद्दीकी,सगीर अहमद सिद्दीकी, ,नसीम अंसारी,गुलाम गौश सिद्दीकी,नथुनी राईन, अब्दुल कलाम,मकबूल आलम सहित काफी संख्या में मुस्लिम हिदू भाई मौजूद रहे।











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