प्रयागराज।
उत्तर प्रदेश में शांति भंग के मामलों में निर्दोष लोगों को जेल भेजने और अवैध हिरासत में रखने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है और बिना कानूनी आधार के 24 घंटे से अधिक हिरासत में रखना गंभीर अधिकार हनन माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि अवैध हिरासत के मामलों में पीड़ित को प्रतिदिन ₹25,000 की दर से मुआवजा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, यह राशि दोषी पुलिस अधिकारियों के वेतन से वसूली जाएगी। अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को 8 दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है तो उसे ₹2 लाख तक का मुआवजा दिया जाना चाहिए।
यह फैसला पूरे उत्तर प्रदेश में लागू होगा और पुलिस प्रशासन को कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करने का स्पष्ट संदेश देता है। मामले में प्रयागराज पुलिस कमिश्नर को 14 सितंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया गया है।
हाईकोर्ट के इस फैसले को नागरिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिससे मनमानी कार्रवाई पर अंकुश लगने की उम्मीद है।










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