पत्नी की हत्याकर घर में ही गाड़ने के मामले में पति को आजीवन कारावास की सजा

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वाराणसी

न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या 14 वाराणसी के न्यायाधीश अतुल चौधरी द्वारा अभियुक्त राजेंद्र प्रसाद को दोषसिद्ध किया गया । अभियोजन की ओर से रोहित मौर्य एडीजीसी (क्रिमिनल) वाराणसी व एडवोकेट सुधांशु गुप्ता द्वारा पैरवी की गई।

अभियोजन कथानक के अनुसार वादी मुकदमा रामविलास हरिजन निवासी,ग्राम-भिटारी थाना-लोहता व उसका भाई अमर घटना के दिनांक,28.12.2020 को सुबह 9:30 बजे घर से अपने काम पर चले जाते हैं और दोपहर में 3:00 बजे अमर जो अभियुक्त का छोटा लड़का है वह घर आता है और अपने पिता से मां के बारे में पूछता है तो पिता द्वारा बताया जाता है की तुम्हारी मां सुनार के दुकान पर गई है आ जाएगी और लगभग शाम को 6:00 बजे अभियुक्त का बड़ा भाई वादी मुकदमा रामविलास हरिजन आता है तो वह भी अपनी

मां के बारे में पूछता है तो उसका भाई अमर बताता है कि पिताजी कब से कह रहे हैं कि मां सुनार के यहां गई है पर अभी तक आई नहीं मुझे शक हो रहा है उसके बाद वह दोनों भाई अपने पिता से फिर से पूछते है तो व कहते हैं कि सुनार के पास गई है आ जाएगी और ये बात कहते हुए वह वहीं पर आंगन में फरसे से मिट्टी को समतल कर रहे थे तो इन दोनों द्वारा पूछा गया कि क्या कर रहे हैं तो राजेंद्र ने कहा कि धूप सिकने के लिए इसको समतल कर रहे हैं वह दोनों भाई कमरे में जाते हैं और देखते हैं कि वहां खून के छिटे पड़े रहते हैं दोबारा पिताजी से पूछते हैं तो वह पान खाने के लिए घर से बाहर चले जाता है

उसके बाद दोनों भाई जहां उनके पिता द्वारा जमीन समतल किया जा रहा था उस जमीन को खोद के देखते हैं तो वहां पर उनकी मां मृतिका आशा देवी को हत्या कर उसके पिता द्वारा वहीं पर गाड़ दिया गया था और उसके शरीर को गलाने के लिए नमक भी डाल दिया गया था तभी उसके पिता आते हैं तो दोनों भाई पूछते हैं तो वह कहता है कि तुम्हारी मां से प्रॉपर्टी मांग रहे थे नहीं दे रही थी तो उसको आज जान से मार कर गाड़ दिया और यह कह कर भाग गए ।

वादी मुकदमा द्वारा इस घटना के बाबत थाना लोहता में मुकदमा पंजीकृत हुआ। और घटना के तीन दिन बाद अभियुक्त राजेंद्र प्रसाद को पुलिस गिरफ्तार करती है विवेचक द्वारा आरोप पत्र राजेंद्र प्रसाद के विरुद्ध न्यायालय में प्रेषित किया जाता है आरोप विरचित होने के बाद अभियोजन द्वारा कुल 10 गवाह परीक्षित कराए गए।

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायालय द्वारा आज अभियुक्त राजेंद्र प्रसाद को दिनांक,09/06/2026 को दोषसिद्ध करते हुए धारा 302 आईपीसी में आजीवन कारावास सश्रम व पचास हजार रुपए अर्थदंड, अर्थदंड न देने पर एक वर्ष कारावास की अतिरिक्त सजा तथा 201 आईपीसी में तीन वर्ष की सजा व बीस हजार रुपए अर्थ दंड जुर्माना, जुर्माना न देने पर चार माह की अतिरिक्त सजा से दंडित किया है।

 

रिपोर्ट –  जगदीश शुक्ला

 

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