नई दिल्ली: चुनावी राज्यों में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद के बीच कांग्रेस हाईकमान ने अपने संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा शुरू कर दी है. पार्टी ने सभी सचिवों और संयुक्त सचिवों से पिछले छह महीनों के कामकाज का विस्तृत ब्यौरा मांगा है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व ने राज्यों के सह-प्रभारि यों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने राज्यों में संगठन को मजबूत करने के लिए किए गए कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट सौंपें. इस रिपोर्ट के जरिए पार्टी यह आकलन करना चाहती है कि संगठन में नियुक्त पदाधिकारी कितने सक्रिय हैं और उन्होंने जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए क्या योगदान दिया है।
»› लेखा-जोखा की तैयारी में जुटे कांग्रेस सचिव:_ बताया जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान के निर्देश के बाद सभी सचिव और संयुक्त सचिव अपने-अपने कार्यों का लेखा-जोखा तैयार करने में जुट गए हैं. उनसे यह जानकारी भी मांगी गई है कि बीते छह महीनों में उन्होंने कितने राज्यों का दौरा किया,
कितने आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया तथा सह-प्रभारी के तौर पर उनकी भूमिका कितनी प्रभावी रही. पार्टी नेतृत्व ने ये भी पूछा है कि प्रदेश संगठन से लेकर बूथ स्तर तक कांग्रेस की विचारधारा को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए क्या प्रयास किए गए. संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम और जनसंपर्क गतिविधियों को भी रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है।
»› रिपोर्ट के आधार पर ही मिलेगी जिम्मेदारी:_ कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि इन रिपोर्टों के आधार पर भविष्य में संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जाएगा. सक्रिय और प्रभावी प्रदर्शन करने वाले नेताओं को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जबकि निष्क्रिय पदाधिकारियों की भूमिका पर भी समीक्षा की संभावना है.
मौजूदा समय में कांग्रेस संगठन में 62 सचिव और 8 संयुक्त सचिव कार्यरत हैं. ऐसे में ये समीक्षा अभियान केवल रिपोर्ट जुटाने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पार्टी के व्यापक संगठनात्मक पुनर्गठन और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
»› 2029 की तैयारी में कोई ढिलाई नहीं चाहती कांग्रेस:_ आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 की तैयारी के मद्देनजर कांग्रेस अब संगठन को लेकर किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती. यही वजह है कि हाईकमान जमीनी स्तर पर सक्रिय नेताओं और केवल पद संभालने वाले नेताओं के बीच स्पष्ट अंतर करना चाहता है।










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