वाराणसी
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मानवाधिकार सहयोग संघ एडीसीए परिवार द्वारा वाराणसी के रविदास पार्क में आयोजित “एक पेड़ मां के नाम” अभियान ने पर्यावरण संरक्षण का ऐसा संदेश दिया, जिसने उपस्थित लोगों के मन में प्रकृति के प्रति नई चेतना और जिम्मेदारी का भाव जागृत कर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं प्रदेश अध्यक्ष बसंत सैनी ने कहा कि केवल पेड़ लगाना ही पर्याप्त नहीं है। बल्कि उसकी देखभाल करना और उसे जीवित रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग पौधे लगाकर फोटो खिंचवा लेते हैं। लेकिन कुछ दिनों बाद वही पौधे देखभाल के अभाव में सूख जाते हैं। यदि हम वास्तव में पर्यावरण बचाना चाहते हैं। तो हमें पौधों को अपने परिवार के सदस्य की तरह सुरक्षित करना होगा।
उन्होंने कहा कि एक पेड़ केवल ऑक्सीजन ही नहीं देता, बल्कि वह मानव जीवन का आधार है। पेड़ हमें फल, फूल, छाया, औषधियां, लकड़ी और शुद्ध वातावरण प्रदान करते हैं। इसलिए हर नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ लगाकर उसकी रक्षा करने का संकल्प लेना चाहिए।

बसंत सैनी ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग करते हुए कहा कि पर्यावरण शिक्षा को विद्यालयों के पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए, ताकि बचपन से ही बच्चों में प्रकृति संरक्षण की भावना विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि यदि आज की पीढ़ी पर्यावरण के प्रति जागरूक होगी, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य मिल सकेगा।
कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष विपिन मिश्रा, जीतू पांडे, जिला महासचिव प्रियव्रत मिश्रा, महिला जिला अध्यक्ष लक्ष्मी अग्रहरि, जिला उपाध्यक्ष किरण पांडे, जिला प्रभारी नीलम श्रीवास्तव, जिला सचिव अर्चना सिंह, विनोद गुप्ता, रवि कुमार, संजीव मिश्रा, ओम प्रकाश दुबे सहित अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में संदेश दिया
“एक पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ”
“पेड़ हैं। तो कल है। पेड़ हैं। तो जीवन है।
आओ मिलकर धरती मां को फिर से हरा-भरा बनाएं
विश्व पर्यावरण दिवस पर मानवाधिकार सहयोग संघ एडीसीए परिवार द्वारा चलाया गया यह अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को यह संदेश देने में सफल रहा कि प्रकृति की रक्षा ही मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। यही संकल्प आने वाले भारत को हरित, स्वच्छ और समृद्ध बनाएगा।










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