सोनार समाज का ऐतिहासिक जुटान, अधिकारों के लिए आर-पार की लड़ाई का एलान’

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सकलडीहां चंदौली

सोनार समाज की सोनार समागम बैठक’ के दौरान एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। ‘सोनार समागम’ के मंच से समाज के प्रबुद्ध दिग्गजों, युवाओं और व्यापारिक संगठनों ने एक सुर में अपनी हुंकार भरी। इस बैठक में सैकड़ों की संख्या में पहुंचे समाज के लोगों ने अपनी एकजुटता का परिचय देते हुए राजनीतिक और सामाजिक उपेक्षा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

बैठक में वक्ताओं ने समाज की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कई महत्वपूर्ण संकल्प लिए। स्वर्णकारों और समाज के व्यापारियों के साथ होने वाली आपराधिक घटनाओं पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने कहा कि अब समाज चुप नहीं बैठेगा और अपनी सुरक्षा के लिए खुद कड़े कदम उठाएगा।

जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक दलों से उचित प्रतिनिधित्व और हिस्सेदारी की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई। समाज के युवाओं के लिए आधुनिक व्यापारिक प्रशिक्षण, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर सहमति बनी।

समाज में व्याप्त फिजूलखर्ची को रोकने और सामूहिक विवाह जैसी पहलों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया। मंच से हुंकार भरते हुए मुख्य संयोजक रवि सर्राफ ने कहा, “सोनार समाज हमेशा से देश की अर्थव्यवस्था और संस्कृति की रीढ़ रहा है। लेकिन हमारी शालीनता को हमारी कमजोरी न समझा जाए। यह समागम केवल एक बैठक नहीं, बल्कि हमारे अधिकारों को हासिल करने का एक शंखनाद है।”

बैठक के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने हाथ उठाकर समाज की एकता को बनाए रखने और हर स्तर पर एक-दूसरे की मदद करने की शपथ ली। इस ‘सोनार समागम’ ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में समाज अपनी मांगों को लेकर और अधिक मुखर होने जा रहा है।

इस बैठक में संत सेठ, आनंद सेठ, गिरधर सेठ, दीपक सेठ, संजय सेठ, अनिल सेठ, राजेंद्र सेठ, मुकुल,आनंद, नवनीत,नवीन सेठ, बंटी सेठ, राजेश सेठ, सरोज सेठ, शुभम सोनी के साथ सैकड़ों सोनार समाज के लोग अपस्थित रहे।

 

रिपोर्ट – अलीम हाशमी

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