वाराणसी:
बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी इन दिनों सिर्फ आध्यात्म और संस्कृति को लेकर नहीं, बल्कि शहर में तेजी से फैल रहे अवैध सट्टा कारोबार को लेकर भी चर्चा में है। शहर के बीचों-बीच कथित तौर पर संचालित हो रहे करोड़ों के जुआ और सट्टा नेटवर्क ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक तरफ पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल अपराध और अवैध गतिविधियों पर सख्ती के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर में खुलेआम चल रहे सट्टे के अड्डे लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। आम जनता पूछ रही है कि आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा खेल संचालित हो रहा है?
“राजा साहब का बंगला” बना सट्टेबाजों का गढ़!
सूत्रों के अनुसार, वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र के मिंट हाउस इलाके में स्थित कथित “राजा साहब का बंगला”*, जिसे वर्तमान में बस स्टैंड क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है, इन दिनों बड़े स्तर पर सट्टा संचालन का केंद्र बना हुआ है।
बताया जा रहा है कि यहां रोजाना लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये का लेन-देन होता है। पूर्वांचल के कई जिलों से बुकी और सट्टेबाज यहां पहुंचते हैं और पूरे नेटवर्क को संचालित करते हैं। देर रात तक चलने वाले इस खेल में हाई-प्रोफाइल लोगों की संलिप्तता की भी चर्चा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कारोबार इतना संगठित तरीके से चल रहा है कि बिना किसी मजबूत संरक्षण के इसका संचालन संभव नहीं लगता।
🚨 शहर के कई इलाकों में फैला नेटवर्क
मामला सिर्फ मिंट हाउस तक सीमित नहीं बताया जा रहा। सूत्रों की मानें तो शहर के कई रिहायशी और व्यस्त इलाकों में भी छोटे-बड़े स्तर पर जुआ और सट्टा खेलवाया जा रहा है।
मोबाइल ऐप, ऑनलाइन पेमेंट और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए भी इस नेटवर्क को संचालित किए जाने की चर्चा है। इससे पुलिस की निगरानी व्यवस्था और साइबर मॉनिटरिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं।
SOG टीमों की चुप्पी पर सवाल
वाराणसी में अपराध नियंत्रण के लिए बनाई गई SOG 1, SOG 2 और SOG 3 जैसी विशेष टीमें भी इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में हैं।
लोगों के बीच चर्चा है कि जब शहर में इतना बड़ा अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है तो आखिर इन टीमों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है?
या फिर सवाल यह है कि सबकुछ जानते हुए भी कार्रवाई से परहेज क्यों किया जा रहा है?
जनता के बीच यह चर्चा भी तेज है कि कहीं कुछ लोग इस नेटवर्क को “संरक्षण” तो नहीं दे रहे।
⚠️ युवाओं को निगल रहा सट्टे का जाल
इस अवैध कारोबार का सबसे खतरनाक असर युवाओं पर पड़ रहा है। आसान कमाई और रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाकर युवाओं को इस दलदल में धकेला जा रहा है।
कई परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से बर्बादी की कगार पर पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में अपराध और नशे की घटनाओं में भी तेजी आ सकती है।
पुलिस पर उठे गंभीर सवाल
शहर के बीचों-बीच यदि करोड़ों का सट्टा कारोबार संचालित हो रहा है, तो बिना स्थानीय स्तर की सहमति या लापरवाही के यह संभव नहीं माना जा रहा।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है—
👉 क्या पुलिस विभाग की कुछ “काली भेड़ें” इस नेटवर्क को संरक्षण दे रही हैं?
👉 या फिर यह केवल प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर निगरानी का परिणाम है?
इन सवालों ने पूरे पुलिस सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है।
कमिश्नर की चेतावनी का क्या हुआ?
गौरतलब है कि हाल ही में पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने सिगरा थाना क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान साफ कहा था कि “जनपद में कोई भी गलत कार्य करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
अब जनता की नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि क्या पुलिस प्रशासन इस कथित सट्टा सिंडिकेट पर बड़ा एक्शन लेगा या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह केवल बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा।
“जनता की आवाज ✍️” जारी रखेगा खुलासा
जनता की आवाज पूर्वांचल ब्रेकिंग न्यूज इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने में जुटा है। आने वाले दिनों में इस कथित सट्टा सिंडिकेट से जुड़े कई बड़े नामों और अंदरूनी खेल का खुलासा किया जाएगा।









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