” हनुमान घाट जिसको स्वयं बनाया था संकट मोचन श्री हनुमान जी ने “

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आनंद रामायण के यात्रा कांड के 35वें और 36वें श्लोक में वर्णन आया है कि भगवान राम के आगमन से पहले उनके परम भक्त हनुमान जी काशी आए। काशी में उन्होंने गंगा के तट पर सुंदर पत्थरों से एक विशाल घाट का निर्माण कराया। काशी के घाटों में “हनुमान घाट” वह घाट है जहां विश्व के सर्वश्रेष्ठ कवि प्रसिद्ध हिंदू संत पूजनीय गोस्वामी तुलसी दास जी ने 16 वीं शताब्दी के दौरान एक हनुमान मंदिर बनवाया था और तब से घाट को हनुमान घाट के नाम से जाना जाता है।

साधु-महात्मा हनुमान घाट पर बड़ी संख्या में निवास करते हैं । हनुमान घाट के ऊपरी भाग में बहुत ही प्राचीन बड़ा हनुमान जी का मंदिर है। इस मंदिर में हनुमान जी के अतिरिक्त राम दरबार नवग्रह एवं एक अश्व भी स्थापित है, जो राम जी के अश्वमेध विजय के प्रतीक की याद दिलाता है। हनुमान मंदिर के प्रांगण में भगवान दत्तात्रेय का बहुत ही भब्य मंदिर है,जिसकी दिवारों पर भगवान दत्तत्रेय की जीवनी से संबंधित अद्भुत चित्रकारी की गयी है ।

साथ ही राम, लक्ष्मण, भरत , शत्रुध्न के आराध्यों को दत्तात्रेय मंदिर के सानिध्य में लिंग रूप मे स्थापित किया गया है । मुख्य रूप से हनुमान घाट एवं मंदिर की पूजार्चन और व्यवस्था दशनामी जूना अखाड़ा के अधीन है। हनुमान घाट मोहल्ला में अधिकतर दक्षिण भारतीय का निवास स्थान है।

हनुमान घाट मोहल्ला में श्रृंगेरी शंकराचार्य का मंदिर है जिसमें कुम्भ स्नान के उपरान्त सभी दश-नामी अखाड़ा के साधु दर्शनार्थ अवश्य आते हैं। हनुमान घाट मोहल्ले में प्रवेश करते ऐसा प्रतीत होता है,जैसे आप वैदिक युग में पहुँच गये हों, जिधर जाँये वैदिक स्वर ही सुनायी देते है।

नमामि गंगे के तत्वाधान में हनुमान घाट की स्वच्छता करके हमने अपने दायित्व का निर्वहन किया है। आग्रह यही है की स्वछता हमारे जीवन में रोगों से मुक्ति का आधार है।जय सियाराम जय जय हनुमान वंदन अभिनंदन

राजेश शुक्ला गंगा सेवक
संयोजक नमामि गंगे काशी क्षेत्र*ब्रांड एंबेसडर नगर निगम

 

रिपोर्ट -विजयलक्ष्मी तिवारी

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