मैंगो जूस *या मीठा जहर चन्दौली में भीषण गर्मी के बीच सेहत से बड़ा खिलवाड़

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चन्दौली

मई की तपती दोपहर, सड़क पर झुलसाती धूप और पसीने से बेहाल लोग… ऐसे में हर किसी को तलाश रहती है एक गिलास ठंडे जूस की। लेकिन चन्दौली में यही राहत अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ती दिख रही है। जनपद के चकिया मुगलसराय चंन्दौली बबुरी व प्रमुख चट्टी-चौराहों, बाजारों और मुख्य मार्गों पर इन दिनों ‘मैंगो जूस’ के नाम पर मिलावट का खेल खुलेआम चल रहा है।

सड़क किनारे लगी दुकानों पर पीले रंग का आकर्षक जूस लोगों को अपनी ओर खींच रहा है, लेकिन अंदर की सच्चाई बेहद चौंकाने वाली बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार कई स्थानों पर सड़े-गले आम, कृत्रिम रंग, केमिकल फ्लेवर और घटिया क्वालिटी के पानी से जूस तैयार किया जा रहा है। बर्फ की ठंडक और मीठे स्वाद के पीछे छिपा यह खेल सीधे लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह से देर रात तक दुकानों पर भीड़ लगी रहती है। मजदूर, राहगीर, छात्र और आम लोग गर्मी से राहत पाने के लिए इन जूस सेंटरों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें शुद्धता नहीं बल्कि बीमारी परोसी जा रही है। कई दुकानों पर साफ-सफाई का नामोनिशान तक नहीं है। खुले में रखे कटे फल, गंदे बर्तन और दूषित पानी के इस्तेमाल से संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह के मिलावटी पेय पदार्थ फूड प्वाइजनिंग, उल्टी-दस्त, पेट संक्रमण और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर खाद्य सुरक्षा विभाग की नजर इस खुले खेल पर क्यों नहीं पड़ रही? क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है?

गर्मी के मौसम में बढ़ती जूस की मांग अब मुनाफाखोरों के लिए कमाई का जरिया बन चुकी है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क किनारे बिक रहे जूस की गुणवत्ता की जांच कराई जाए, सैंपल लिए जाएं और मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता की सेहत के साथ हो रहे इस खिलवाड़ पर रोक लग सके।

 

रिपोर्ट – अलीम हाशमी

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