गरीबों की आह और मेहनतकशों का दर्द आखिर कब समझेगा समाज महंगाई की मार से टूट रहा गरीब, शासन-प्रशासन और समाज को जागने की ज़रूरत है।

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वाराणसी

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) खेल एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सचिव सुरेश कुमार शर्मा ने देश में बढ़ती महंगाई, मजदूरों की बदहाल स्थिति और पत्रकारों की पीड़ा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज गरीब, मजदूर और मेहनतकश वर्ग सबसे ज्यादा उपेक्षा का शिकार हो रहा है। रोज कमाने और रोज खाने वाले परिवारों की जिंदगी महंगाई ने पूरी तरह झकझोर कर रख दी है।

उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे झोपड़ों और किराए के मकानों में रहने वाले गरीब परिवार अपने बच्चों का पेट पालने, शिक्षा दिलाने और भविष्य सुरक्षित करने के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई ने उनकी उम्मीदों और सपनों को तोड़ दिया है। आज गरीब आदमी के लिए घर का राशन, बच्चों की फीस, इलाज और वाहन में तेल भरवाना तक मुश्किल होता जा रहा है।

सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि एक तरफ समाज का संपन्न वर्ग आलीशान गाड़ियों में घूम रहा है। बड़े-बड़े समारोह कर रहा है। और करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ मजदूर वर्ग 12-12 घंटे काम करने के बावजूद सम्मानजनक जीवन नहीं जी पा रहा है। मजदूरों का शोषण लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है।

उन्होंने कहा कि गरीब पिता का भी सपना होता है। कि वह अपनी बेटी को सम्मान के साथ विदा करे। अच्छे कपड़े पहनाए और खुशहाल जीवन दे। लेकिन महंगाई ने उसके सपनों को अधूरा कर दिया है। आखिर यह कैसा विकास है। जहां अमीर और अमीर होता जा रहा है। और गरीब लगातार टूटता जा रहा है।

राष्ट्रीय सचिव ने पत्रकारों की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि देश का पत्रकार हर वर्ग की आवाज उठाता है। चाहे व्यापारी हो, किसान हो, मजदूर हो, डॉक्टर हो, पुलिस प्रशासन हो या किसी गरीब परिवार की त्रासदी पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर सच्चाई जनता और शासन तक पहुंचाने का कार्य करता है। लेकिन जब वही पत्रकार आर्थिक संकट में होता है। तब उसके दर्द को समझने वाला कोई नहीं होता है।

उन्होंने कहा कि कई पत्रकार ऐसे हैं। जिनके पास खबर कवरेज करने के लिए बाइक में पेट्रोल भरवाने तक के पैसे नहीं होते, फिर भी वे अपने कर्तव्य और साहस के बल पर घटनास्थल तक पहुंचकर सच्चाई उजागर करते हैं। पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। इसलिए उनके सम्मान और सुरक्षा की जिम्मेदारी समाज और सरकार दोनों की है।

सुरेश कुमार शर्मा ने शासन-प्रशासन, उद्योगपतियों, व्यापारियों और समाज के संपन्न वर्ग से अपील करते हुए कहा कि गरीबों और मजदूरों के दर्द को समझना होगा। जिस मेहनतकश वर्ग के श्रम से देश की अर्थव्यवस्था चलती है। यदि उसी वर्ग की अनदेखी होती रही तो यह सामाजिक असंतुलन देश के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत तभी महान बनेगा, जब यहां अमीर और गरीब के बीच समानता, सम्मान और भाईचारे का भाव मजबूत होगा। समाज का हर वर्ग यदि एक-दूसरे के दुख-दर्द को समझे और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आए, तभी “सबका साथ, सबका विकास” का सपना साकार हो सकेगा।

अंत में उन्होंने कहा कि
अपना भला होय जग माही, गरीबों का होय चाहे देरी सही

यह संदेश केवल सरकार के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज और व्यापारी वर्ग के लिए एक आईना है। कि समय रहते गरीबों और आम जनता की आवाज को समझा जाए तथा उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिलाया जाए।

 

रिपोर्ट –  जगदीश शुक्ला

 

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