वाराणसी कांग्रेस महानगर अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, बनारस क्लब की भूमि कचहरी विस्तार के लि‍ए उपलब्ध कराने की मांग

Picture of voiceofshaurya@gmail.com

voiceofshaurya@gmail.com

FOLLOW US:

Share

वाराणसी।

कचहरी को वर्तमान स्थान से अन्यत्र विस्थापित किए जाने की चर्चाओं एवं प्रस्तावों के विरोध में कांग्रेस महानगर अध्यक्ष एवं अधिवक्ता राघवेन्द्र चौबे ने प्रधानमंत्री एवं वाराणसी के सांसद, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी को विस्तृत पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि वाराणसी कचहरी केवल एक न्यायालय परिसर नहीं, बल्कि पूर्वांचल के लाखों लोगों की न्यायिक आस्था, सामाजिक विश्वास, प्रशासनिक समन्वय और लोकतांत्रिक व्यवस्था का केंद्र है।

राघवेन्द्र चौबे ने अपने पत्र में कहा कि वर्तमान समय में वाराणसी कचहरी परिसर में स्थानाभाव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो चुकी है, जिसके कारण अधिवक्ताओं, वादकारियों तथा न्यायिक कार्यों को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इस समस्या का समाधान कचहरी को शहर से दूर अन्यत्र विस्थापित करना नहीं, बल्कि वर्तमान परिसर का योजनाबद्ध विस्तार करना है। उन्होंने सुझाव दिया कि कचहरी विस्तार हेतु वर्तमान परिसर से सटे बनारस क्लब की भूमि को उपलब्ध कराया जाए, जो सबसे उपयुक्त, व्यावहारिक और जनहितकारी विकल्प सिद्ध होगा।

उन्होंने कहा कि बनारस क्लब को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित किया जा सकता है, किंतु कचहरी को उसके मूल न्यायिक क्षेत्र से हटाना न्याय व्यवस्था और आम जनता — दोनों के हितों के विरुद्ध होगा। काशी की ऐतिहासिक कचहरी वर्षों से नगर के केंद्र में विकसित हुई है, जहां प्रतिदिन हजारों लोग न्यायिक कार्यों हेतु पहुंचते हैं। यदि इसे शहर से दूर स्थानांतरित किया गया तो गरीब, ग्रामीण, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं, दिव्यांगजन और दूर-दराज़ से आने वाले वादकारी सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इससे न्याय प्राप्ति महंगी, जटिल और आम जनता की पहुंच से दूर होती चली जाएगी।

राघवेन्द्र चौबे ने कहा कि अधिवक्ता समाज एवं समस्त काशीवासियों की स्पष्ट भावना है कि कचहरी का “विस्तारीकरण” हो, “विस्थापन” नहीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रस्ताव के खिलाफ अधिवक्ता समाज पूरी एकजुटता के साथ खड़ा है और आने वाले समय में भी इस निर्णय को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगा। यह केवल अधिवक्ताओं का आंदोलन नहीं, बल्कि काशी की जनता की सामूहिक आवाज़ है, जो अपनी ऐतिहासिक न्यायिक व्यवस्था, जनसुविधा और शहर की मूल संरचना को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि बनारस ने लगातार तीन बार स्थानीय नेतृत्व से ऊपर उठकर उन्हें अपना सांसद चुना है। ऐसे में काशी की जनता और अधिवक्ता समाज की भावनाओं की रक्षा करना उनकी नैतिक एवं लोकतांत्रिक जिम्मेदारी भी है। प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ वह काशी के जनप्रतिनिधि भी हैं, इसलिए उन्हें इस विषय को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार एवं प्रशासनिक अधिकारियों को जनभावनाओं के अनुरूप निर्णय लेने हेतु निर्देशित करना चाहिए।

राघवेन्द्र चौबे ने अपने मांग पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार, मंडलायुक्त वाराणसी, जिलाधिकारी वाराणसी को भी प्रेषित करते हुए मांग की है कि अधिवक्ता समाज एवं आम जनता की भावनाओं का सम्मान किया जाए तथा वाराणसी कचहरी विस्थापन के प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अधिवक्ताओं और काशीवासियों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है

तथा न्यायिक व्यवस्था, जनसुविधा और काशी की ऐतिहासिक पहचान के संरक्षण हेतु हर लोकतांत्रिक संघर्ष में सहभागी बनेगी। कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक सिंह, अधिवक्ता लोकेश सिंह एवं अधिवक्ता वीरेंद्र पंडित ने महानगर अध्यक्ष राघवेन्द्र चौबे द्वारा लिखे गए समर्थन पत्र को दी सेंट्रल बार एसोसिएशन तथा बनारस बार एसोसिएशन के सम्मानित अध्यक्षों को सौंपकर अधिवक्ता समाज के आंदोलन को समर्थन प्रदान किया।

 

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई