” गंगा अष्टकम का पाठ करके गंगा के संरक्षण का आह्वान”

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” दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती के दौरान गूंजा ” ज्योत से ज्योत जगाते चलो – प्रेम की गंगा बहाते चलो”

गंगाष्टकम का पाठ माँ गंगा की स्तुति, उनके पवित्र स्वरूप का वर्णन और उनके प्रति अटूट श्रद्धा प्रकट करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। महाकवि कालिदास द्वारा विरचित यह स्तोत्र गंगा के पावन जल में स्नान करने या उसके निकट निवास करने से होने वाले मोक्ष और पाप मुक्ति की प्रार्थना करता है।

शुक्रवार को प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति के तद्भावधान में होने वाली मां गंगा की आरती के दौरान नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने मां गंगा की स्तुति करते हुए हजारों श्रद्धालुओं को बताया कि हे देवि गंगे! तुम तीनों लोकों की समृद्धि हो, तुम स्वर्ग की सीढ़ी (स्वर्गसोपान) हो। तुम्हारे चंचल तरंगों में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

हे भगवती, हमें अपनी शरण में लो और हम पर कृपा करो। हे गंगा! तुम्हारी एक बूंद का स्पर्श पाकर ही प्राणी जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाते हैं। जो तुम्हारे तट पर निवास करते हैं, वे वैकुंठ के समान ही सुख भोगते हैं। हे माता! तुम त्रिलोक पावनी हो, तुम ब्रह्मांड को पवित्र करती हुई,

भगवान शिव की जटाओं से निकलकर, कनकगिरि की गुफाओं से होती हुई पृथ्वी पर बहती हो। हे पतितोद्धारिणी! तुम पापों का नाश करने वाली हो। तुम्हारा पवित्र जल, जो भगवान विष्णु के चरणों से निकला है, हमें पवित्र करे और हमें सांसारिक दुखों से मुक्ति दिलाए। गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने गंगाष्टकम का पाठ करते हुए कहा हम गंगा मैया से न केवल मोक्ष की कामना करते हैं,

बल्कि उनके प्रति हमारे दायित्वों का भी स्मरण करते हैं। गंगाष्टकम में वर्णित गंगा के निर्मल स्वरूप को बनाए रखने के लिए, हमें उनके जल में किसी भी प्रकार का प्रदूषण (जैसे- कचरा, प्लास्टिक, पूजा सामग्री, औद्योगिक अपशिष्ट) नहीं डालने का संकल्प लेना चाहिए। कहा कि हमें गंगा की अविरल धारा को सुनिश्चित करना होगा, यानी नदी के तटों पर वृक्षारोपण करना और तटों का संरक्षण करना,

ताकि वे प्राकृतिक रूप से संरक्षित रहें। गंगा का संरक्षण केवल सरकार का नहीं, बल्कि हम सबका व्यक्तिगत और सामूहिक कर्तव्य है। गंगा की शुद्धता को बनाए रखना ही उनका सच्चा सम्मान है। आयोजन के दौरान गंगोत्री सेवा समिति के सचिव पं० दिनेश शंकर दुबे, गंगा आरती अर्चक व बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे

 

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी

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