जिसमे माँ मरीना ने अपने 5 साल के बेटे जहान को खुद से अलग नहीं किया और लाइफ जैकेट मे ही बेटे को भी कस के बाँध लिया लेकिन कुदरत का कहर कहें या अफरा तफरी का माहौल कहें की जितने भी लोग उस समय बचाने आये तो किसी ने भी पलटे हुए
क्रूज़ शिप के अंदर नहीं देखा जहाँ आख़री दम तक माँ मरीना अपने बेटे जहान को सीने से लापटाये अपनी अंतिम साँसे ले रही थी । सभी मे इधर उधर ढूँढा लेकिन किसी ने पलटे हुए क्रूज़ शिप के अंदर नहीं देखा। देर पर देर होती चली गई और माँ बेटे की साँसे टूटती गयीं। इस हादसे मे मरीना की सास की भी मृत्यु हो गई।











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