इलिया
राम कथा का मतलब होता है पहले दिन से लेकर अंतिम दिन तक भाव से अगर आपने राम कथा सुनी है तो भगवान आपको अवश्य अपना दर्शन देंगे। राम कथा सुनने का मतलब होता है कि श्रवण और मन दोनों में कथा आ जाए तब वह सफल होता है। उक्त बातें क्षेत्र के खरौझा हिनौती स्थित हनुमान मंदिर पर हनुमान सेवा समिति द्वारा आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा की चौथी निशा पर काशी से पधारीं कथावाचिका मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने कहीं।
उन्होंने कहा कि अगर परिवार से प्रेम होगा तो लक्ष्मी आपके घर से नहीं जाएंगी। और यदि परमात्मा से प्रेम होगा तो भगवान आपके घर से नहीं जाएंगे। उन्होंने खीर की महत्व को बताते हुए कहा कि खीर में पड़ा हुआ चावल कम है और दूध ज्ञान है और चीनी उसकी भक्ति है।
वहीं उन्होंने कहा कि रामचरितमानस केवल एक ग्रंथ नहीं बल्कि वह एक मंत्र भी है जिसको बार-बार रत्न से अपने आप भगवान की भक्ति मिल जाती है। वहीं उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को हमेशा आप सेवा से जोड़ी तभी वह शीलवान बनेंगे और तभी वह परिवार और गार्जियन की बात मानेंगे और आगे बढ़ेंगे।
शालिनी त्रिपाठी ने विश्वामित्र जी का प्रसंग सुनाया। राम कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि महाराजा दशरथ ने महल में पहुंचने पर विश्वामित्र का सत्कार किया। इसके साथ ही श्रीराम और लक्ष्मण को उन्हें सौंप दिया ताकि राक्षसों का अंत किया जा सके।
विश्वामित्र जी बड़े प्रेम के साथ राम और लक्ष्मण को लेकर अपने आश्रम की ओर चले रास्ते में अनेक विद्याओं का ज्ञान विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण को दिया। और चलते चलते मार्ग में ताड़का की भयंकर आवाज को सुना विश्वामित्र जी के इशारे पर राम जी ने एक ही बाण में ताड़का के प्राण हर लिए।
अब तो राम जी की जय जयकार होने लगी चलते चलते विश्वामित्र अपने आश्रम में आए और बड़ी धूमधाम से राम लक्ष्मण का स्वागत आश्रम के ब्रह्मचारी ने किया। विश्वामित्र जी ने अनेक विद्याओं का ज्ञान दिया। रामजी ने विश्वामित्र से यज्ञ करने के लिए प्रार्थना की विश्वामित्र जी ने बड़े आनंद के साथ यज्ञ प्रारंभ किया।
इस दौरान राजन सिंह, त्रिवेणी द्विवेदी, दशरथ पाण्डेय, शशिकांत पाण्डेय,मंगरू द्विवेदी,अजय पाण्डेय, पप्पू पाण्डेय, प्रियंका सिंह रोली सिंह, रूद्र प्रिया सिंह, जमुना देवी, सहित तमाम लोग मौजूद रहे।











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