वाराणसी
अपराधियों के लिए ‘नो एंट्री’ जोन बनने जा रही है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के रणनीतिक विजन ने वाराणसी पुलिसिंग का चेहरा बदल दिया है। ‘मिशन शक्ति’ को केवल नारों तक सीमित न रखकर, कमिश्नरेट ने अब फ्रंट लाइन की कमान शहर की सबसे जांबाज महिला अधिकारियों के हाथों में सौंप दी है।
वर्दी का दबदबा: तीन अधिकारियों की तिकड़ी से कांपेगा अपराध वाराणसी के अलग-अलग जोन में अब महिला अधिकारियों का ‘सख्त शासन’ शुरू हो चुका है। इस बदलाव के केंद्र में तीन नाम सबसे प्रमुखता से उभर रहे हैं:
नीतू काद्दयान (IPS) डीसीपी, गोमती जोन | ‘लेडी सिंघम’ के रूप में विख्यात, सख्त अनुशासन और त्वरित न्याय के लिए जानी जाती हैं।
लिपि नागयाच (IPS) एडीसीपी, वरुणा जोन | अपनी ‘दबंग’ छवि और फील्ड पर अपराधियों के छक्के छुड़ाने के लिए मशहूर। मानसी दहिया (IPS) प्रभारी, चोलापुर | युवा जोश और आधुनिक पुलिसिंग की मिसाल, जिन्हें स्वतंत्र प्रभार देकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अपराध मुक्त काशी का संकल्प पुलिस कमिश्नर की इस ‘मास्टरस्ट्रोक’ रणनीति के पीछे कई अहम उद्देश्य हैं:
अपराधियों में दहशत: महिला अधिकारियों की सख्त कार्यशैली और जीरो टॉलरेंस नीति से माफिया और गुंडों के बीच हड़कंप मचा हुआ है।
महिला सुरक्षा: इन अधिकारियों के नेतृत्व से जनपद की महिलाओं में सुरक्षा का भाव बढ़ा है। अब वे अपनी शिकायतें निडर होकर रख पा रही हैं। संवेदनशील पुलिसिंग: जहाँ एक ओर ये अधिकारी अपराधियों के लिए ‘काल’ हैं, वहीं आम जनता के लिए बेहद संवेदनशील और मददगार साबित हो रही हैं।
मिशन शक्ति का नया स्वरूप
वाराणसी में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि पुलिस प्रशासन के शीर्ष और महत्वपूर्ण फील्ड पदों पर एक साथ इतनी महिला आईपीएस अधिकारी मोर्चा संभाले हुए हैं। डीसीपी नीतू काद्दयान की रणनीति, एडीसीपी लिपि नागयाच का दबदबा और आईपीएस मानसी दहिया की सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि काशी की गलियों में अब कानून का राज और भी सख्त होगा।











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