अंबेडकरनगर जनपद के जहाँगीरगंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों एक गंभीर विवाद के चलते सुर्खियों में बना हुआ है। यहाँ तैनात एक स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी के ऊपर अवैध वसूली (रिश्वतखोरी) का गंभीर आरोप लगाया गया है जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। यह मामला तब और अधिक संवेदनशील हो गया जब शिकायतकर्ता के बयान के विपरीत कुछ कथित यूट्यूब चैनल , फेसबुक चैनलों द्वारा कर्मचारी के पक्ष में खबरें प्रसारित की जाने लगीं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जहाँगीरगंज क्षेत्र के निवासी युवक पंकज कुमार ने संबंधित स्वास्थ्य कर्मी के खिलाफ यह आरोप लगाया है कि वह अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों से विभिन्न प्रकार की सेवाओं के नाम पर अवैध धन की मांग करता है। पंकज कुमार का कहना है कि उनसे भी जबरन पैसे मांगे गए, और पैसे न देने पर उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में टालमटोल की गई।
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से यह कर्मचारी इसी प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त रहा है। कई स्थानीय लोगों ने भी अनौपचारिक रूप से इस तरह की घटनाओं की पुष्टि की है, लेकिन अब तक डर या दबाव के कारण किसी ने खुलकर शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटाई थी। पंकज कुमार द्वारा उठाया गया यह कदम अन्य पीड़ितों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है।
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब कुछ कथित यूट्यूब, फेसबुक चैनलों द्वारा इस प्रकरण को उल्टा प्रस्तुत करते हुए शिकायतकर्ता के खिलाफ ही खबरें चलाई जाने लगीं। इन चैनलों पर कर्मचारी का पक्ष दिखाते हुए यह दर्शाने की कोशिश की गई कि आरोप निराधार हैं और शिकायतकर्ता किसी निजी द्वेष के चलते झूठे आरोप लगा रहा है। इससे न केवल मामले की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हुआ है बल्कि मीडिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ इस तरह के गंभीर आरोप लगते हैं, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। न कि बिना जांच के किसी एक पक्ष को सही या गलत ठहराया जाए। इस मामले में भी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को संज्ञान लेते हुए एक स्वतंत्र जांच समिति का गठन करना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि सरकारी अस्पतालों में इस प्रकार की अवैध वसूली की घटनाएं गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन जाती हैं। जिन लोगों को मुफ्त या सस्ती चिकित्सा सेवाएं मिलनी चाहिए, उनसे यदि पैसे वसूले जाते हैं, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि मानवता के खिलाफ भी एक गंभीर अपराध है।
पंकज कुमार द्वारा लगाया गया आरोप यदि सही पाया जाता है, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश और निगरानी तंत्र को भी मजबूत किया जाना चाहिए।
अंततः यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति या एक कर्मचारी का नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराए और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि जनता का विश्वास सरकारी संस्थाओं पर बना रहे।
रिपोर्ट – पंकज कुमार










Users Today : 12
Users This Year : 18076
Total Users : 30669
Views Today : 12
Total views : 60889