प्रयागराज।
रमज़ान का मुबारक महीना रहमत, बरकत और मग़फिरत का महीना माना जाता है। इस पाक महीने में जहां बड़े लोग अल्लाह की रज़ा और उसकी इबादत के लिए रोज़े रखकर नमाज़, तरावीह और तिलावत-ए-क़ुरआन में मशगूल हैं, वहीं शहर के कई नन्हे रोज़ेदार भी पूरे जज़्बे और शौक के साथ इबादत की राह पर चल पड़े हैं। महज़ 5 से 12 साल की उम्र के बच्चे भी अपने वालिदैन और घर के बुजुर्गों को देखकर रोज़ा रखने और नमाज़ अदा करने की कोशिश कर रहे हैं, अब तो मुबारक महीना जा रहा है हमसे विदा हो रहा है।
किन्जा अहमद नव वर्ष कक्षा चार की गर्ल्स हाई स्कूल की छात्रा है परीक्षा चल रही थी परीक्षा खत्म होते ही उन्होंने अपनी मां से रोजा रखने की इच्छा राखी मां ने उन्हें सहरी कराया बड़े आसानी से उन्होंने अपना पहला रोजा पूरा किया मां और खाला को नमाज रोजा इबादत करते देखती थी इसी वजह से इनको यह नसीहत मिली किंन्जा अहमद एक कुरान मुकम्मल कर चुकी है किनजा अहमद के पहले रोजे पर रोजा इफ्तार का इंतजाम किया गया, परिवार के लोगों ने उन्हें दुआएं व उपहार दिया।










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