वैदिक विज्ञान केन्द्र, सं. वि.ध.वि. संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी द्वारा आयोजित त्रि – दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी

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वैदिक विज्ञान केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी द्वारा दिनांक 16-18 मार्च, 2026 को “वैदिक विज्ञान के विविध स्वरूप” विषय पर त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, पर्यावरण एवं जीवनदर्शन विज्ञान तथा 6. विधि एवं प्रबन्ध विज्ञान हैं।

जिसके उप-विषय- 1. यज्ञ विज्ञान 2. आयुर्विज्ञान 3. शब्दतत्त्व विज्ञान 4. गणित एवं भुवनकोश विज्ञान 5.

इस सम्मेलन में देश-विदेश के लगभग 200 प्रतिष्ठित विद्वान शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, एवं विषय-विशेषज्ञ भाग लेंगे। इस आयोजन का उद्देश्य संपूर्ण वैदिक साहित्य में निहित ज्ञान के वैज्ञानिक अध्ययन और शोध का प्रसार करना तथा वेदों में निहित ज्ञानराशि से समाज को लाभान्वित करना है, जिससे प्रकृतिमूलक एवं चिरस्थायी शाश्वत विकास की अवधारण पुष्ट हो सके।

‘सर्वज्ञानमयो हि सः’ इस शास्त्र वचन के अनुसार जगत में व्याप्त समस्त ज्ञानविज्ञान के मूलश्रोत वेद ही हैं, जिनके आश्रयण से जीवमात्र के सर्वविध निश्रेयस का मार्ग प्रशस्त होता है। चाहे ऐहिक (सांसारिक) सुख हो अथवा आमुष्मिक (पारलौकिक) सुख, उभयविध सुखसिद्धि के लिए वेदप्रतिपादितज्ञानाश्रय ही एक मात्र अपरिहार्य साधन है। अतः वेदों में अन्तर्निहित ज्ञान-विज्ञान के समग्र परिशीलन हेतु ‘वैदिक विज्ञान के विविध स्वरूप’ इस विषय पर त्रि-दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।

उक्त संगोष्ठी में विश्वविश्रुत विद्वानों के द्वारा वेद (संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद्) वेदाङ्ग, स्मृतिशास्त्र, पुराण आदि में निहित यज्ञ विज्ञान, आयुर्विज्ञान, शब्दतत्त्व विज्ञान, गणित एवं भुवनकोश विज्ञान, पर्यावरण एवं जीवनदर्शन विज्ञान तथा विधि एवं प्रबन्धन विज्ञान के वेदमूलक स्वरूप का आधुनिक विज्ञान की दृष्टि से सूक्ष्मातिसूक्ष्म विवेचन करना प्रस्तावित है।

राष्ट्रगौरव की पुनः प्रतिष्ठा हेतु वैदिक विज्ञान को वैधिक पटल पर उपस्थापित करना तथा समसामयिक समस्याओं के निराकरण में वैदिक विज्ञान के प्रायोगिक पक्ष के अनुवर्तन का मार्ग प्रशस्त करना तथा वैदिक परंपरा में निहित वैज्ञानिक दृष्टि, दार्शनिक गहराई तथा मानवीय कल्याण से जुड़े विविध आयामों पर वैश्विक स्तर पर विमर्श को प्रोत्साहित करना है। यह सम्मेलन प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक चिंतन के मध्य सेतु निर्माण का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

कार्यक्रम में वैदिक साहित्य में वर्णित सिद्धांतों की आधुनिक संदर्भों में प्रासंगिकता एवं उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यह स्थापित करना है कि वैदिक विज्ञान केवल आध्यात्मिक विचारधारा तक सीमित नहीं है अपितु यह जीवन के व्यावहारिक, सामाजिक, वैज्ञानिक और प्रबंधकीय पक्षों को भी गहराई से प्रभावित करता है।

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अंतर्गत विभिन्न उपविषयों पर विशिष्ट सत्र आयोजित किए जाएंगे जिसमें –

यज्ञ विज्ञान सत्र के अंतर्गत यज्ञ की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि, पर्यावरणीय शुद्धि, मानसिक स्वास्थ्य तथा ऊर्जा संतुलन में इसकी भूमिका पर चर्चा होगी।

आयुर्विज्ञान सत्र में वेद मूलक पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों, प्राकृतिक उपचार प्रणाली, स्वास्थ्य संरक्षण और रोग निवारण में वैदिक ज्ञान की उपयोगिता पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

गणित एवं भुवनकोश विज्ञान सत्र के अन्तर्गत खंड में वैदिक गणित की विशिष्ट पद्धतियाँ, खगोलीय

गणनाएँ तथा प्राचीन भारतीय ज्योतिर्विज्ञान की वैज्ञानिकता को प्रस्तुत किया जाएगा। शब्द तत्व विज्ञान सत्र में ध्वनि, मंत्रों की शक्ति, भाषागत संरचना और संप्रेषण की वैदिक

अवधारणाओं पर प्रकाश डाला जाएगा।

पर्यावरण एवं जीवन दर्शन विषय पर सत्र के अंतर्गत प्रकृति संरक्षण, संतुलित जीवन शैली, नैतिक

मूल्यों तथा सतत विकास की वैदिक दृष्टि पर चर्चा होगी।

विधि एवं प्रबंधन विज्ञान सत्र में सामाजिक व्यवस्था, न्याय प्रणाली, प्रशासनिक सिद्धांतों तथा नेतृत्व कौशल में वैदिक सिद्धांतों की प्रासंगिकता सहित उपयोगिता को रेखांकित किया जाएगा।

सम्मेलन के माध्यम से शोधार्थियों और युवा पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने तथा नवीन शोध के लिए प्रेरित करने का भी उद्देश्य है। यह आयोजन अंतरविषयक शोध को बढ़ावा देगा और वैश्विक बौद्धिक समुदाय के समक्ष वैदिक विज्ञान की प्रासंगिकता को स्थापित करेगा।

यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण की दिशा में एक सशक्त पहल सिद्ध होगा। इस सम्मेलन के तीन दिनों में उद्घाटन एवं समापन के अतिरिक्त कुल 7 परिचर्चा सत्र होंगे जिनमें पूर्व निर्धारित उप विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की जाएगी।

सम्मेलन का उद्घाटन 16.03.2026 को प्रातः 10:30 बजे संकायप्रमुख प्रो. राजाराम शुक्ल की अध्यक्षता में संपन्न होगा, जिसमें मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी जी एवं विशिष्ट अतिथि प्रो. मुरली मनोहर पाठक, लालबहादुर शास्त्री केंद्रीय संस्कृति विश्वविद्यालय, नई दिल्ली तथा प्रो. रमाकांत पांडेय कुलपति उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय होंगे। सम्मेलन का समापन सत्र 18 मार्च 2026 को सायं 04.00 बजे से संपन्न होगा, जिसकी अध्यक्षता माननीय कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी करेंगे और इसमें मुख्यातिथि डॉ. शिवकुमार शर्मा, अखिल भारतीय संगठन मंत्री, विज्ञान भारती तथा विशिष्ट अतिथि प्रो० शिवशंकर मिश्र, कुलपति महर्षि पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन होंगे।

संगोष्ठी में सम्मिलित होने वाले निम्नलिखित कुछ विशिष्ट विद्वानों की सूची-

डॉ. शिव कुमार शर्मा, अखिल भारतीय संगठन मन्त्री, विज्ञान भारती, नई दिल्ली

प्रो. श्याम नारायण लाभ, जन्तुविज्ञान विभाग, त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल

प्रो. मुरली मनोहर पाठक, कुलपति, श्रीलालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली

प्रो. रमाकान्त पाण्डेय, कुलपति, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार

प्रो. सन्निधान सुदर्शन शर्मा, पूर्व कुलपति, श्रीवेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय, तिरुपति

प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय, पूर्व संकायप्रमुख, सं.वि.ध.वि. संकाय, का.हि.वि.वि., वाराणसी

प्रो. राजाराम शुक्ल, संकायप्रमुख, संस्कृतविद्या धर्मविज्ञान संकाय, का. हि.वि.वि., वाराणसी

प्रो. शिवशंकर मिश्र, कुलपति, महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन

प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी, पूर्व कुलपति, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार

प्रो. अमरपाल सिंह, कुलपति, राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ

प्रो. हृदय रंजन शर्मा, उपाध्यक्ष, महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन

प्रो. के. के. द्विवेदी, सदस्य, आयुष मंत्रालय, नई दिल्ली

प्रो. रामनाथ झा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली

प्रो. महेश व्यास, आल इण्डिया इन्स्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, मथुरा

प्रो. हरिराम मिश्र, जवाहरला नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली

प्रो. रामराज उपाध्याय, पौराहित्य विभाग, श्रीलालबहादुरशास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली

प्रो० आलोक चतुर्वेदी, यू.एस.एस.

प्रो. ईश्वर भट्ट, ज्योतिष विभाग, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर, जयपुर

डॉ. ओम प्रकाश पाण्डेय, प्रख्यात वैज्ञानिक, नासा

प्रो. मनोज कुमार मिश्र, अध्यक्ष, वेद विभाग, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, प्रयागराज

प्रो. जे.एन. त्रिपाठी, भूगर्भ विज्ञान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज

डॉ. नवीन कुमार झा, नेपाल

प्रो. नचिकेता त्रिपाठी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर

डॉ. एच. लुसी गेस्ट, यू.के.

Tkachenko Hanna, Ukrain.

प्रो. रंजन त्रिपाठी, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

प्रो. बलराम पाढ़ी, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

 

रिपोर्ट धनेश्वर साहनी

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