इस बार होलिका दहन सोमवार को आधी रात के बाद या फिर मंगलवार को भोर में करना श्रेयस्कर माना जा रहा है। दो मार्च को भद्रा पुच्छ में रात 12:50 से रात 02:02 बजे तक या फिर भद्रा समाप्त होने के बाद तीन मार्च को भोर में 4:56 बजे के बाद भद्रारहित काल में होलिका दहन करना श्रेष्ठ है। रंग भरी होली 4 मार्च को खेली जाएगी।
लखनऊ के ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिए उत्तम मानी जाती है। यदि भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा का अभाव हो लेकिन भद्रा मध्य रात्रि से पहले ही समाप्त हो जाए तो प्रदोष के पश्चात जब भद्रा समाप्त हो तब होलिका दहन करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि यदि भद्रा मध्य रात्रि तक व्याप्त हो तो ऐसी परिस्थिति में भद्रा पूंछ के दौरान होलिका दहन किया जा सकता है। भद्रा मुख में होलिका दहन करना कतई उचित नहीं होता है। इस वर्ष होली दहन 2 और 3 मार्च को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
रंग भरी होली 4 मार्च को खेली जाएगी
काशी के ऋषिकेश पंचांग के अनुसार, दो मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम 05:18 बजे से शुरू होकर 3 मार्च को शाम 04:33 तक रहेगी। भद्रा दो मार्च को शाम 5:18 से 3 मार्च की सुबह 4:56 बजे तक रहेगी। होलिका दहन दो मार्च को भद्रा पुच्छ में रात 12:50 से रात 02:02 बजे तक या फिर भद्रा समाप्त होने के बाद तीन मार्च को भोर में 4:56 बजे के बाद भद्रारहित काल में करना श्रेष्ठ है। रंग भरी होली 4 मार्च को खेली जाएगी।
3 को चंद्रग्रहण दोपहर 3:21 से शाम 6:46 बजे तक
स्नान दान के लिए पूर्णिमा तिथि 3 मार्च है। इस वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण भी तीन मार्च को पड़ रहा है। यह एक ग्रस्तोदय चंद्र ग्रहण होगा जो भारत के कुछ हिस्सों में ही दिखेगा। ग्रहण दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:46 मिनट तक रहेगा। 3 मार्च को सूतक प्रात: 9:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक पूरे नौ घंटे का होगा। ग्रहण के कारण होली से जुड़ा कार्य नहीं होगा। पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 2 मार्च को शाम 05:55 बजे से होगा और 3 मार्च को शाम 05:07 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त होगी।









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