वाराणसी/प्रयागराज।
प्रयागराज के करेली की गलियों से निकला नाम — राशिद नसीम — जिसने रियल एस्टेट कंपनी शाइन सिटी के जरिए पूरे देश में ठगी का जाल बिछाया, अब दुबई में गिरफ्तारी के बाद फिर सुर्खियों में है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में उसके खिलाफ 554 मुकदमे दर्ज हैं। एजेंसियां अब उसे भारत लाने की प्रक्रिया में जुटी हैं।
लेकिन इस पूरे खेल में सबसे अहम किरदार रहा उसका बनारस और पूर्वांचल का “मैनेजर” — पड़ोसी जिले का वह शख्स, जिसने कुछ ही वर्षों में एजेंट से ‘ब्लॉक का पदाधिकारी’ बनने तक का सफर तय किया और अरबों की ठगी के नेटवर्क को जमीन पर खड़ा किया।
करेली से बनारस, फिर लखनऊ और दुबई तक का सफर
प्रयागराज के करेली निवासी राशिद नसीम ने वर्ष 2013 में शाइन सिटी की स्थापना की। पहला कार्यालय प्रयागराज में खोला गया। महज छह माह के भीतर उसने प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जिला जज कम्पाउंड के सामने लग्जरी ऑफिस खोलकर बड़ा संदेश दिया — “अब खेल बड़ा होगा।” यहीं से एंट्री हुई उसके खास गुर्गे की, जिसे बनारस और पूरे पूर्वांचल की कमान सौंप दी गई।
‘ब्लॉक किंग’ गुर्गे का खेल: ठगी, हवाला और प्रॉपर्टी साम्राज्य
सूत्रों के मुताबिक, इस गुर्गे ने कुछ ही महीनों में जमीन निवेश, फर्जी कमीशन और अग्रिम राशि के नाम पर लोगों से मोटी रकम ऐंठनी शुरू कर दी।
बताया जाता है कि:
* शाइन सिटी समूह की कंपनियों से जुड़े सौदों में फर्जी कमीशन के नाम पर करोड़ों की वसूली हुई।
* इस रकम से उत्तर प्रदेश, मुंबई और गुजरात में कमर्शियल लैंड और प्रॉपर्टी खरीदी गई।
* महज तीन वर्षों में एजेंटों का देशव्यापी नेटवर्क खड़ा कर दिया गया।
चौंकाने वाली चर्चा यह भी रही कि जब राशिद नसीम नेपाल में गिरफ्तार हुआ था, तब इसी गुर्गे ने अपने “नेटवर्क” और कथित हवाला कारोबारियों के जरिए करीब 3 करोड़ रुपये नेपाल पहुंचाए। इसके बाद राशिद को नेपाल से छुड़ाकर दुबई शिफ्ट कराने में भूमिका निभाई गई।
ED की एंट्री और शिकंजा
सूत्रों के अनुसार, दिसंबर 2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राशिद के करीबी गुर्गे को गिरफ्तार किया था। जांच में मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी निवेश योजनाएं और हवाला लेन-देन के सुराग मिले।
अब जबकि राशिद नसीम यूएई में गिरफ्तार हो चुका है, ED और अन्य एजेंसियां प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज कर चुकी हैं। माना जा रहा है कि पूछताछ में उसके बनारस और पूर्वांचल नेटवर्क से जुड़े कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
सवालों के घेरे में ‘ब्लॉक’ की राजनीति
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि ठगी के पैसों के दम पर गुर्गे ने अपने गृह जिले में ब्लॉक का पद हासिल किया। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या आर्थिक अपराध के पैसे से स्थानीय राजनीति तक पहुंच बनाई गई?
यदि एजेंसियां गहराई से जांच करती हैं तो पूर्वांचल में कई सफेदपोश चेहरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अब आगे क्या?
* राशिद नसीम का भारत प्रत्यर्पण
* मनी ट्रेल की फॉरेंसिक जांच
* बेनामी संपत्तियों की कुर्की
* नेटवर्क से जुड़े एजेंटों और राजनीतिक संरक्षण की जांच
शाइन सिटी का यह “ठगी साम्राज्य” भले ही दुबई से संचालित हो रहा था, लेकिन उसकी जड़ें पूर्वांचल की धरती में गहराई तक फैली थीं। अब देखना यह है कि जांच एजेंसियां सिर्फ सरगना तक सीमित रहती हैं या ‘ब्लॉक किंग’ जैसे मैदानी खिलाड़ियों पर भी सख्त कार्रवाई होती है।











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