महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर, शिव बाराती झूम उठे

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वाराणसी  आध्यात्मिक काशी नगरी एक अलग कलात्मक शहर है, यहां पर कर्म, धर्म, पूजा एक अलौकिक ढंग से दिखाई देता है, बाबा विश्वनाथ की नगरी है। यहां पर देश-विदेश के लोग पर्यटक बाबा का दर्शन पूजन करने आते हैं। गंगा घाट पर सुबह की छटां जिस तरह से सुशोभित करता है कि मानव समस्त देवता विराजमान है।

आइए शिव विवाह की वर्णन बताते हैं

मंदिर चली थी गौरी मगर क्या खबर इन्हें इनके शहरों में तो हजारों पुजारीहैं, देवों में महादेव की महिमा अपार है उनका अलख जगाओ तो बेड़ा पार है।
सुनिए लगा के ज्ञान कथा है अथाह की, महिमा सुन रहा हूं मैं शंकर विवाह की,

इस बारात की अगवाई नारद मुनि ने की कैलाश पर बधाई हर एक देवता ने दी, शंकर जी दूल्हा बनके चले बूढ़े बैल पर जंगल ,पहाड़, मेघ लगें गाने झूम कर,

भूत, प्रेत ,संग, खड़े दुवारीं
बिच्छू सांप गले में डारीं

अंग विभूति बदन लगाएं ब्याह करनं शिव शंकर आए।

जिस समय भगवान शंकर की बारात राजा हिमाचल के दरवाजे पर द्वार पूजा के लिए पहुंचती है। उस समय पार्वती की सभी सखियां भगवान शंकर को देखकर जाकर रहती है गौरा

यह तो तुम्हारा पति पूरा मदारी लग रहा है, अपने पूरे शरीर में भस्मं लगाएं गले में सर्प लपेटे पूरे बदन में बिच्छू सांपों का सिंगार किया है। और यह भी बात बूढ़ें बैंल पर बैठकर आ रहा है। सभी बाराती भूत ,प्रेत, टेंड़े मेंड़े चल रहे हैं, किसी का चेहरा आगे दिखाई दे रहा किसी का चेहरा पीछे दिखाई दे रहा है, कोई अपने मुंख से आग उगल रहा है हे गौरा दीदी बड़ी भयावन

बारात दिखाई दे रही। मुझे तो डर लग रहा है।

जब इस बात की सूचना गौरा जी को मिंलती है तो तुरंत खिड़की से झांक कर देखने लगती है। प्रभु की महिमा प्रभुहिं ही जाने गौर माता का नजर और शिंव जी की नजर यूं ही मिली। की बारात का छटां ही बदल गया।

*देख छविं मुख बरनीं नां जाई
बांजन लागें ढोल शहनाई

पल भर में बांरातियों का दृश्य ही बदल गया। देव, गंधर्व,किन्नर नरेश संत महात्मा विराजमान हो गए।
इतना सुशोभित बारात तैयार हो गया कि लोगों के मुख वर्णन करने में शिवलिंन हो गए चारों तरफ नाच गाना ढोंल नगाड़े की थांप सें सारां मंडल गूंज उठा।

सभी देवताओं ने बाबा भोलेनाथ के ऊपर पुष्पों का वर्षा करने लगे घटाएं भी झूमने लगें पेड़ पौधे ,भीं झूमनें लगें

महादेव की महिमा अपार है उनका अलखं जगाओं , तो बेड़ा पार है, हर हर महादेव🪷🙏

 

रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला

 

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